Tuesday, January 27, 2026
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UGC विवाद पर सामने आया केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान, जानिए विरोध प्रदर्शन के बीच क्या बोले?

यूजीसी विवाद को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्र, शिक्षक और बाकी संगठन सीधे तौर पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान सामने आया है।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Jan 27, 2026 04:22 pm IST, Updated : Jan 27, 2026 04:35 pm IST
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान- India TV Hindi
Image Source : PTI केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए रेगुलेशन पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान सामने आया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।' धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के 2026 के समानता नियमों को लेकर बढ़ते विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों, शिक्षकों और आलोचकों को ये आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि नए नियम भेदभाव को जन्म नहीं देंगे और कोई भी कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकता है।

शैक्षिक परिसरों में विरोध प्रदर्शन तेज

उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब शैक्षिक परिसरों में विरोध प्रदर्शन और ऑनलाइन प्रतिक्रियाएं इन नियमों के खिलाफ तेज हो रही हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'मैं अत्यंत विनम्रतापूर्वक यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूजीसी के नए नियमों से किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। कानून का दुरुपयोग किसी के द्वारा नहीं किया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'चाहे वह यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, इसका दुरुपयोग न होने देना हमारी जिम्मेदारी होगी।'

सुप्रीम कोर्ट के तहत लिया गया ये निर्णय

उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय भारत के संविधान की सीमाओं के भीतर लिया गया है। यह निर्णय भारत के सुप्रीम कोर्ट के अधीन लिया गया है। इसलिए, यह किसी के भी खिलाफ किसी भी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं देगा।

जानिए क्या है विवाद?

हायर एजूकेशन में जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने के नाम पर UGC द्वारा लाए गए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम, 2026' का पूरे देश में विरोध हो रहा है। नियम 13 जनवरी को अधिसूचित होकर 15 जनवरी से लागू हो गए, लेकिन अब यह शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। UGC का दावा है कि ये नियम 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए लाए गए हैं।

जानिए क्या है पूरे विवाद की जड़?

  • हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equity Committee, Equity Squad और Equal Opportunity Cell (EOC) बनाना अनिवार्य।
  • SC, ST और OBC छात्रों-कर्मचारियों के खिलाफ जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर तुरंत जांच।
  • 24×7 हेल्पलाइन, नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग।
  • भेदभाव साबित होने पर संस्थान की फंडिंग रोकी जा सकती है, डिग्री/कोर्स पर रोक या UGC मान्यता रद्द हो सकती है।
  • भेदभाव की परिभाषा को विस्तार दिया गया, जिसमें OBC को स्पष्ट शामिल किया गया।

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