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नोएडा में बुजुर्ग दंपति से 3.14 करोड़ रुपये की ठगी, 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर के रखा

 Published : Mar 21, 2025 07:36 am IST,  Updated : Mar 21, 2025 09:32 am IST

उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक बुजुर्ग दंपति को 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर के रखा गया है। इस दौरान दंपति से 3.14 करोड़ रुपये की ठगी की गई है।

नोएडा में डिजिटल अरेस्ट की घटना।- India TV Hindi
नोएडा में डिजिटल अरेस्ट की घटना। Image Source : FILE

भारत के अनेक राज्यों में साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं। ठग लोगों की मेहनत की कमाई पर आसानी से कब्जा कर रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट का ताजा मामला उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) से आया है। यहां ठगों ने एक बुजुर्ग दंपति से कुल 3.14 करोड़ रुपये ठग लिए हैं। ठगी के दौरान बुजुर्ग दंपति को करीब 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर के रखा गया था।

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस ने गुरुवार को इस पूरी घटना को लेकर जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, ये घटना नोएडा सेक्टर-75 की है और पीड़ित का नाम बिरज कुमार सरकार है जो कि निजी बैंक से रिटायर अधिकारी हैं। बुजुर्ग ने गुरुवार को साइबर थाने में ठगी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस को पूरे घटना की जानकारी दी है।

ठग ने खुद को TRAI का अधिकारी बताया

पुलिस के मुताबिक, ठग ने खुद को मुंबई के कोलाबा थाने का अधिकारी बताया और बुजुर्ग दंपति को गिरफ्तार करने की धमकी दी थी। ठग ने उन्हें गिरफ्तारी से बचने के लिए बताए गए खातों में पैसे डालने को कहा। बुजुर्ग ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि बीते 25 फरवरी को उनके पास एक शख्स का फोन आया जिसने खुद को TRAI का अधिकारी बताया। शख्स ने बुजुर्ग से पुराने नंबर की जानकारी मांगी। नंबर मिलने के बाद फोन करने वाले ने कहा कि संबंधित नंबर के तार नरेश गोयल मनी लान्ड्रिंग से जुड़े है। शख्स ने ये भी कहा कि बुजुर्ग के खिलाफ कोलाबा पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है।

डरा धमका कर पैसे ट्रांसफर करवाए

पुलिस के मुताबिक, ठगों ने बुजुर्ग की बात थाने के कथित अधिकारी से कराई। कथित अधिकारी ने बुजुर्ग से थाने में पेश होने को कहा। मना करने पर उसने प्रक्रिया को ऑनलाइन आगे बढ़ाने की बात कही। ठगों ने बुजुर्ग दंपति से IPS अधिकारी और CBI अधिकारी बनकर बात की। दंपति को डरा धमका कर पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाए गए।

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?

दरअसल, कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई सिस्टम नहीं है। ये पूरी तरह से धोखा है। ठग लोगों को पुलिस, सीबीआई, नार्कोटिक्स, आरबीआई जैसे अधिकारी बनकर पूरी हिम्मत के साथ फोन करते हैं। ये आपकी कई निजी जानकारी जानते हैं। और ये ठग आपको ऐसी जानकारी बताकर आपके भीतर भय का माहौल पैदा करेंगे। ठग कई बार वर्दी में रहेंगे और अपने पीछे पुलिस के लोगो भी लगा के रखते हैं। फिर ठग आप पर झूठे इल्जाम लगाकर आपको कानून की धाराओं और गिरफ्तारी का भय दिखाएंगे। वह आपसे बैंक समेत कई जरूरी जानकारी लेंगे और आपके पैसे ठग लेते हैं।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचे?

अगर आप जागरूक हैं तो डिजिटल अरेस्ट से बचना काफी आसान है। आम तौर पर अनजान नंबर से फोन न उठाएं। अगर फोन उठा भी लें तो ये बात याद रखें कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल पर इस तरह से पूछताछ नहीं करती। इसलिए डरे नहीं और अपनी कोई भी निजी जानकारी ठग को न दें। आप इस फोन कॉल का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड कर लें और इसे राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या फिर cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट कर दें। आप पुलिस को भी सूचित कर सकते हैं। (इनपुट: भाषा)

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