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अधिक पोत बनाने के लिए तैयार रहें पोत कारखाने : पर्रिकर

 Written By: IANS
 Published : May 27, 2015 06:29 am IST,  Updated : May 27, 2015 06:30 am IST

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के पोत कारखानों से कहा है कि वे भारतीय नौसेना और तटरक्षकों को नए युद्धपोतों और अन्य प्लेटफार्म की आपूर्ति में

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अधिक पोत बनाने के लिए तैयार रहें पोत कारखाने : पर्रिकर

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के पोत कारखानों से कहा है कि वे भारतीय नौसेना और तटरक्षकों को नए युद्धपोतों और अन्य प्लेटफार्म की आपूर्ति में तेजी लाएं। पर्रिकर ने यहां नौसेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक साल में नौसेना के आधुनिकीकरण योजना ने कई नए प्लेटफार्म के प्रवेश के साथ महत्वपूर्ण तेजी पकड़ी है।

पर्रिकर ने नौसेना की क्षमताओं के स्वदेशी विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों पर संतोष जताया।

उन्होंने कहा, "भारत में प्रत्येक पोत के जलावतरण या पनडुब्बी की शुरुआत किसी के लिए व्यक्तिगत रूप से तथा पूरे भारत के लिए गौरव का पल होता है।"

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समय सभी 48 पोत और पनडुब्बियां ऑर्डर के तहत भारतीय गोदियों में निर्मित किए जा रहे हैं, जो प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया परिकल्पना के अनुरूप है।

उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और समुद्री हितों के संरक्षण में अथक एवं निस्वार्थ रूप से अपना कर्तव्य निभाने के लिए नौसेना कर्मियों की सराहना की।

उन्होंने युद्धग्रस्त यमन में 'ऑपरेशन राहत' के दौरान बेहद खतरनाक एवं युद्ध जैसे हालात में लगभग 35 देशों के नागरिकों को बाहर निकालने में भी नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका को सराहा।

पर्रिकर ने 'ऑपरेशन नीर' के दौरान तत्काल कार्रवाई के लिए भी नौसेना की प्रशंसा की, जहां भारत के नौसेनिक पोतों ने पिछले साल दिसंबर में मालदीव को पीने का पानी उपलब्ध कराया तथा अपने समुद्री पड़ोसियों के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया।

पर्रिकर ने यह भी कहा कि सेवा शर्तो में सुधार और वर्दीधारी सैनिकों का कल्याण उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में है।

रक्षा मंत्री ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) और अन्य निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के सहयोगियों के साथ नौसेना की सक्रिय साझेदारी को भी सराहा।

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