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नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग पर राज्यसभा बाधित

 Written By: IANS
 Published : May 08, 2015 08:22 pm IST,  Updated : May 08, 2015 08:23 pm IST

नई दिल्ली: केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को राज्यसभा में काफी हंगामा हुआ। कांग्रेस के नेतृतव में विपक्षी सदस्यों ने गडकरी की कंपनी में कथित अनियमितता पर उनसे

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नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग पर राज्यसभा बाधित

नई दिल्ली: केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को राज्यसभा में काफी हंगामा हुआ। कांग्रेस के नेतृतव में विपक्षी सदस्यों ने गडकरी की कंपनी में कथित अनियमितता पर उनसे इस्तीफे की मांग की। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी एक रपट में गडकरी का नाम पुर्ति सखर कारखाना लिमिटेड के एक प्रमोटर या निदेशक के रूप में लिया है, जिसे नियमों का उल्लंघन करते हुए इंडियन रिन्युबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने 84.12 करोड़ रुपये ऋण दिया था।

यह मुद्दा शून्यकाल के दौरान उठाया गया, जिस कारण कुछ विषयों को छोड़कर कार्यदिवस के लिए तय अन्य मुद्दे पर काम नहीं हो पाया।

सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.30 बजे तक के लिए स्थगित होने से पहले इसे कई बार स्थगन का सामना करना पड़ा। विपक्ष ने मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की।

कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने सत्तारूढ़ भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि जब वे विपक्ष में थे तो भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर कई बार सदन की कार्यवाही बाधित करते थे।

शर्मा ने कहा, "प्रधानमंत्री को सदन में आना चाहिए। हम कुछ और नहीं स्वीकारेंगे। वह विश्वभर में जाकर अपने पूर्ववर्तियों को बदनाम करते हैं। हम जवाबदेही तय करना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा, "पहले वह देश के खजाने पर प्रधानमंत्री के रूप में जाते हैं और फिर अपनी पार्टी के प्रचारक बन जाते हैं।"

संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, जबकि उपसभापति पी.जे.कुरियन ने सदस्यों से प्रक्रिया का पालन करते हुए नोटिस देने को कहा। लेकिन विपक्ष ने इससे इंकार कर दिया।

कांग्रेस सदस्य सभापति की आसंदी के नजदीक जमा हो गए और उन्होंने गडकरी के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की।

इस दौरान दोनों पक्षों के बीच वाकयुद्ध जारी रहा।

नकवी ने आधारहीन आरोप लगाने पर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमने शून्यकाल के दौरान कहा कि भ्रष्टाचार को हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम भ्रष्टाचार पर चर्चा को तैयार हैं। पीएसी कैग रपट की जांच करेगी।"

उन्होंने कहा, "हमारे पास कैग रपट है, यह आरोप आधारहीन हैं।"

यह मुद्दा सदन में कांग्रेस नेता शांतराम नाईक ने उठाया था। उन्होंने कहा, "विपक्षी दल समय समय पर हमारे मंत्रियों के इस्तीफे की मांग करते रहे हैं, अब नितिन गडकरी को इस्तीफा देना चाहिए।"

शून्यकाल के दौरान सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई और प्रश्नकाल के दौरान सदन को तीन बार स्थगन का सामना करना पड़ा, जब सभापति हामिद अंसारी ने कार्यवाही अपराह्न 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

अपराह्न 2.30 बजे भी विरोध जारी रहा और कार्यवाही फिर एक घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

इससे पहले विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजादी ने सदन में कहा, "यह किसी सदस्य के खिलाफ आरोप का सवाल नहीं है, यह कैग की रपट है। कैग की रपट के आधार पर पहले भी शीर्षस्थ लोगों को हटाया गया है।"

आजाद ने कहा, "भाजपा सरकार सदन के बाहर और अंदर पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की बात करती है। यह संप्रग सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार की भी बात करती है। यहां एक मंत्री के खिलाफ साबित हो चुका मामला है, जिन्हें इसके पहले इसी कारण से भाजपा अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। पार्टी कह सकती है कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया..। उन्हें मामले में निरुद्ध किया गया है लिहाजा वह एक दिन भी मंत्री नहीं रह सकते।"

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