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'आजाद परिंदे को भी आसमान पर नजर रखनी चाहिए', शशि थरूर की पोस्ट के बाद आया कांग्रेस का जवाब

 Published : Jun 26, 2025 11:10 pm IST,  Updated : Jun 26, 2025 11:18 pm IST

कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा X पर की गई एक पोस्ट और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ से पार्टी में अनबन होने लगी है। मणिकम टैगोर ने इसी मसले पर तंज कसते हुए थरूर को एक तरह से चेतावनी दी है।

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कांग्रेस नेता शशि थरूर। Image Source : PTI

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के अंदर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसे पार्टी नेतृत्व के साथ उनके तल्ख रिश्तों की अटकलों से जोड़ा जा रहा है। जवाब में, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने तंज कसते हुए कहा, 'आजाद परिंदे को भी आसमान में सावधानी बरतनी चाहिए।' बता दें कि विवाद की शुरुआत तब हुई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बयान में तंज कसते हुए कहा था, 'कांग्रेस के लिए देश पहले है, लेकिन कुछ लोगों के लिए मोदी पहले हैं।'

थरूर ने X पर शेयर की थी एक उड़ते परिंदे की तस्वीर

खरगे के तंज कसने के कुछ ही मिनटों बाद, थरूर ने X पर एक उड़ते परिंदे की तस्वीर शेयर की और लिखा, 'उड़ने की इजाजत मत मांगो। पंख तुम्हारे हैं, और आसमान किसी का नहीं।' इस पोस्ट को खड़गे के बयान का जवाब माना गया, जिससे थरूर की पार्टी के भीतर नाराजगी की खबरें और तेज हो गईं। थरूर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उन्होंने हाल ही में एक अखबार में लिखे लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। उन्होंने मोदी को भारत के लिए 'महत्वपूर्ण संपत्ति' बताया और उनकी 'ऊर्जा, गतिशीलता और जुड़ाव की इच्छा' की सराहना की।

'आजाद परिंदे को भी आसमान पर नजर रखनी चाहिए'

गुरुवार को मणिकम टैगोर ने X पर बिना नाम लिए थरूर पर निशाना साधते हुए लिखा, 'परिंदों को उड़ने के लिए इजाजत की जरूरत नहीं। लेकिन आज के दौर में आजाद परिंदे को भी आसमान पर नजर रखनी चाहिए। बाज, गिद्ध और चील हमेशा शिकार की ताक में रहते हैं। आजादी मुफ्त नहीं, खासकर जब शिकारी देशभक्ति के पर पहनकर आते हैं।' टैगोर का यह बयान थरूर को सावधान करने का एक प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है। बता दें कि थरूर के नए रुख ने उनके बीजेपी में जाने की अटकलें तेज हो गईं, लेकिन उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनके बयान राष्ट्रीय हित और ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में थे, न कि किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत थे।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही पार्टी से बढ़ रही दूरी

थरूर को ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था, जो सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाता है। लेकिन उनके बयानों ने, जिसमें उन्होंने यूपीए सरकार के समय की सर्जिकल स्ट्राइक को कमतर बताते हुए मोदी सरकार की कार्रवाई की तारीफ की, कांग्रेस नेताओं में नाराजगी पैदा कर दी। थरूर ने अपने बचाव में कहा कि उनके बयानों को 'आलोचकों और ट्रोल्स' ने गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा, 'मेरे पास बनावटी गुस्से का जवाब देने से बेहतर काम हैं।' उन्होंने पार्टी नेतृत्व के साथ किसी औपचारिक मतभेद से इनकार किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि दृष्टिकोण और राय में कुछ मतभेद हैं।

कई बार पार्टी की लाइन से अलग नजर आते हैं थरूर

थरूर ने बार-बार अपनी कांग्रेस के प्रति वफादारी जताई है, लेकिन उनकी स्वतंत्र राय और बयान पार्टी के मुख्य संदेशों से कई बार अलग नजर आते हैं। यह विवाद कांग्रेस के अंदर एकता और नेतृत्व के सवालों को फिर से सामने लाता है। यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती बन सकता है, क्योंकि थरूर जैसे प्रभावशाली नेता का पार्टी लाइन से अलग हटना चर्चा का विषय बना हुआ है।

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