जम्मू-कश्मीर: देश भर की तरह इस बार श्रीनगर में भी दशहरा का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया गया। सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि 1990 के बाद पहली बार दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित विजयादशमी मनाने के लिए कश्मीर पहुंचे।
बुराई पर अच्छाई की जीत का यह उत्सव श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में मनाया गया। हजारों की भीड़ के सामने यहां रावण दहन की परंपरा पूरी की गई, जहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के 50 फुट ऊंचे पुतलों का दहन किया गया।
सुरक्षाकर्मियों सहित 5,000 से ज्यादा लोगों ने भगवान राम के जयकारों और पारंपरिक संगीत के साथ इस समारोह में भाग लिया। दशकों में यह सबसे बड़ी भीड़ थी। जलते हुए पुतलों ने शाम के आसमान को रोशन कर दिया और जयकारों की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
"यह हम सभी के लिए एकता और आशा का क्षण"
इस अवसर पर मौजूद कश्मीरी पंडित समुदाय ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, "कश्मीर में दशहरा हमारे दिलों में एक विशेष स्थान रखता है। यह हमें एक समुदाय के रूप में एकजुट करता है और हमारी विरासत के साथ हमारे बंधन को मज़बूत करता है।"
उन्होंने आगे कहा, "घाटी में दशहरा मनाना हमें अपनी जड़ों और साझा परंपराओं की याद दिलाता है। यह सिर्फ एक त्यौहार नहीं है, यह हम सभी के लिए एकता और आशा का क्षण है।"
कई पंडित 1990 में विस्थापन के बाद पहली बार रावण दहन देखने कश्मीर आए थे। उनमें से एक ने भावुक होते हुए कहा, "यह एक अद्भुत एहसास है। आज पुरानी यादें ताजा हो गईं और मुझे याद आया कि हम बरसों से इस जगह से दूर थे। एक दिन हम जरूर वापस आएंगे।"
ये भी पढ़ें-
भारत और चीन के बीच फिर से डायरेक्ट फ्लाइट सर्विसेज होंगी बहाल, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी