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'अपनी जगह वापस पाने का समय आ गया है', कश्मीरी पंडितों से बोले एलजी मनोज सिन्हा

 Reported By: Manzoor Mir Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 13, 2026 02:42 pm IST,  Updated : Jun 13, 2026 02:42 pm IST

मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर का भविष्य उज्ज्वल है। इसे पाने के लिए कश्मीरी पंडितों को अपनी जगह वापस लेनी चाहिए। इसका समय आ चुका है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ना चाहिए।

Manoj Sinha- India TV Hindi
एलजी मनोज सिन्हा Image Source : X/MANOJ SINHA

जम्मू कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि अब जम्मू कश्मीर के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी जगह वापस पाने का समय आ गया है। SKICC में 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव: फ्रॉम एक्साइल टू एक्सीलेंस' (निर्वासन से उत्कृष्टता तक) नाम से दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ है। सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में एलजी मनोज सिन्हा समेत कई प्रमुख राजनीतिक और नागरिक हस्तियां शामिल हुईं।

उद्घाटन भाषण देते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि अब कश्मीरी पंडितों के लिए अपनी जगह वापस पाने का समय आ गया है। सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को अब अपनी जड़ों से फिर से जुड़ना चाहिए और बदले हुए जम्मू-कश्मीर के भविष्य में योगदान देना चाहिए। विस्थापन से वैश्विक सफलता तक समुदाय की यात्रा साहस, लचीलेपन और दृढ़ संकल्प का एक अद्भुत उदाहरण है।

36 साल बाद लौटे कश्मीरी पंडित

SKICC में आयोजित 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव: फ्रॉम एक्साइल टू एक्सीलेंस' विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक जमावड़ा है। वे 36 साल बाद कश्मीर लौटे हैं, जो कश्मीरी पंडित समुदाय को उसकी मातृभूमि से फिर से जोड़ने का एक ऐतिहासिक क्षण है। एलजी सिन्हा ने कहा, "मेरे सामने इस मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं। हम श्रीनगर में एक ऐतिहासिक क्षण के गवाह बन रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कश्मीर ने समुदाय के विस्थापन का दर्द देखा था और अब वह उनके पुनरुत्थान और नए आत्मविश्वास का गवाह बन रहा है।

विस्थापित कश्मीरियों की तारीफ की

एलजी ने कहा कि विस्थापन के बाद समुदाय के सामने दो विकल्प थे। एक निराशा और हार का, और दूसरा पुनर्निर्माण और समाज की सेवा का। समुदाय की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, "आसान रास्ता निराशा का था, लेकिन आपने पुनर्निर्माण, कड़ी मेहनत और सेवा का रास्ता चुना। आपने अपने संघर्ष को ताकत में और अपने दर्द को मकसद में बदल दिया; समुदाय के लिए असली जीत अपनी पहचान और परंपराओं को बचाए रखना है।"

साझा विरासत से दोबारा जुड़ने का समय

इस कॉन्क्लेव को उम्मीद का संदेश बताते हुए सिन्हा ने कहा कि समुदाय के कई सदस्य, जिन्होंने कभी विस्थापन का सामना किया था, आज नए आत्मविश्वास के साथ अपनी मातृभूमि से जुड़ने के लिए लौट रहे हैं। सिन्हा ने कहा, "जो लोग बेघर और विस्थापित हो गए थे, वे आज आत्मविश्वास के साथ लौट रहे हैं। यह अपने आप में उम्मीद और नई शुरुआत का एक सशक्त संदेश है।" एलजी सिन्हा ने कहा, "यह कॉन्क्लेव जम्मू-कश्मीर के भविष्य और सुरक्षा माहौल में बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रतीक है।" उन्होंने कहा, "यह सभा एक मज़बूत संदेश देती है कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य में भरोसा बढ़ा है। अब पुराने रिश्तों को फिर से बनाने और अपनी साझा विरासत से दोबारा जुड़ने का समय आ गया है।"

साहसिक कहानियों का संगम

उपराज्यपाल ने कहा कि बहुत से लोग कभी मानते थे कि विस्थापित समुदाय कभी वापस नहीं आ पाएगा या खुद को फिर से स्थापित नहीं कर पाएगा, लेकिन उनकी हिम्मत ने इसे गलत साबित कर दिया। सिन्हा ने समुदाय की मज़बूती की तारीफ़ करते हुए कहा, "कई लोगों को लगता था कि समुदाय विस्थापन से कभी उबर नहीं पाएगा। फिर भी, दृढ़ संकल्प, नेतृत्व और लगन से आपने वापसी और नई शुरुआत के सपने को ज़िंदा रखा।" इस सम्मेलन को "साहस की अनगिनत कहानियों का शानदार संगम" बताते हुए सिन्हा ने कहा कि एक नया जम्मू-कश्मीर उभर रहा है और इसके भविष्य को आकार देने में कश्मीरी पंडित समुदाय की अहम भूमिका होगी। सिन्हा ने समुदाय से कहा, "एक नया जम्मू-कश्मीर उभरा है। इसकी ताकत, उम्मीदें और भविष्य आपकी भागीदारी और योगदान से गहराई से जुड़े हैं।" यह कहते हुए कि यह समुदाय अपनी जड़ों से भी जुड़ा रहा, सिन्हा ने कहा, "आप देश या दुनिया में कहीं भी रहें, आपकी सफलता आपकी जड़ों और विरासत से जुड़ी रहती है।"

बलिदान और उम्मीदें प्रेरणा देंगी

इस सम्मेलन को पीढ़ियों के बीच एक पुल बताते हुए सिन्हा ने कहा, "यह सभा पीढ़ियों को जोड़ती है और यह सुनिश्चित करती है कि समुदाय की यादें, बलिदान और उम्मीदें भविष्य को प्रेरित करती रहें।" एलजी ने कहा कि समाज को विस्थापन की त्रासदी के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए और न्याय, सम्मान और मेल-मिलाप की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह याद दिलाता है कि हमें विस्थापन के दर्द के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और न्याय, सम्मान और स्थायी मेल-मिलाप की दिशा में काम करना चाहिए।" लेफ्टिनेंट गवर्नर ने सदस्यों से जम्मू-कश्मीर में संस्थान स्थापित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि आप संस्थान बनाएं, प्रतिभा को निखारें और जम्मू-कश्मीर के विकास में योगदान दें। आपका अनुभव और ज्ञान इस जमीन के भविष्य के लिए बहुत कीमती है।"

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