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ED करेगी झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ की जांच, PMLA के तहत दर्ज किया केस

झारखंड में बांग्लादेशी लोगों की घुसपैठ पर लगातार बहस जारी है। इस बीच ईडी ने भी इस मामले में एंट्री ले ली है। ईडी घुसपैठ से जुड़े मनी लान्ड्रिंग की जांच करेगी। एजेंसी ने केस भी दर्ज कर लिया है।

Reported By : Atul Bhatia Edited By : Subhash Kumar Published : Sep 18, 2024 01:53 pm IST, Updated : Sep 18, 2024 02:06 pm IST
झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ की जांच करेगी ईडी। - India TV Hindi
Image Source : PTI झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ की जांच करेगी ईडी।

झारखंड में बीते कुछ महीनों से बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा काफी गरम है। कई क्षेत्रों में घुसपैठ को ही आदिवासियों की आबादी में कमी का कारण बताया जा रहा है। अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी की ईडी की भी एंट्री हो गई है। जानकारी के मुताबिक, झारखंड में घुसपैठ मामले की ईडी जांच करेगी। एजेंसी ने PMLA के तहत केस भी दर्ज कर लिया है। ईडी ने झारखंड पुलिस की एफआईआर को आधार बनाया है और मनी लान्ड्रिंग की आशंका जताई है। ईडी बांग्लादेशी महिलाओं की तस्करी और संदिग्ध घुसपैठ में मनी लान्ड्रिंग पर जांच करेगी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला रांची के बरियातू थाने में 4 जून 2024 को  दर्ज की गई एफआईआर संख्या 188 पर आधारित है। एफआईआर के मुताबिक, 21 साल की निपा अख्तर ख़ुशी को मनीषा राय नाम की लड़की द्वारा बांग्लादेश से कोलकाता लाया गया था। मनीषा ने झूमा नाम की एक और लड़की और निजी एजेंटों की मिलीभगत से जंगल क्षेत्र से निपा अख्तर को अवैध रूप से बांग्लादेश सीमा पार कराया।

फर्जी दस्तावेज भी दिलवाया जा रहा

जिस केस की ईडी जांच करेगी वह उन एजेंटों की मदद से बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ से संबंधित है जो उन्हें भारतीय नागरिकता स्थापित करने के लिए फर्जी दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं। ईडी के मुताबिक कई लोग अवैध घुसपैठ, फर्जी पहचान प्रमाण बनाने से संबंधित कानूनी गतिविधियों में शामिल हैं। ये काम पीएमएलए, 2002 की धारा 2 (1) (यू) के तहत अपराध की आय से जुड़ी आपराधिक गतिविधियां हैं।

संपूर्ण और व्यापक जांच करना जरूरी

ईडी के मुताबिक, बांग्लादेश से भारत में ऐसे व्यक्तियों की अवैध घुसपैठ और ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले एजेंटों के संबंध में जांच करना जरूरी है। क्योंकि इनका उद्देश्य अपराध की आय प्राप्त करना और अन्य आपराधिक गतिविधियां करना है। इसलिए इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत एक संपूर्ण और व्यापक जांच करना जरूरी है।

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