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झारखंड: सत्तारूढ़ गठबंधन में तनाव की अटकलें तेज, हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरे से मची हलचल, क्या महागठबंधन से अलग होगी JMM?

 Published : Dec 03, 2025 11:33 pm IST,  Updated : Dec 03, 2025 11:33 pm IST

झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों झामुमो, कांग्रेस एवं राजद के रिश्तों में “तनाव” की खबरों की खबरें के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरों के बीच राज्य में राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।

Hemant Soren- India TV Hindi
हे्मंत सोरेन Image Source : PTI

रांची: झारखंड में हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली जेएमएम महागठबंधन से अलग होगी? क्या जेएमएम एनडीए के साथ गठबंधन करेगी? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो झारखंड की सियासत में हलचल मचाए हुए हैं। झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों झामुमो, कांग्रेस एवं राजद के रिश्तों में “तनाव” की खबरों की खबरें के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरों के बीच राज्य में राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। झारखंड में संभावित सियासी बदलाव की अटकलें तब शुरू हुई थीं, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के दिवंगत नेता शिबु सोरेन के दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती होने के दौरान बीजेपी के कई सीनियर नेता उनका हालचाल जानने पहुंचे थे। अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन के राजधानी दिल्ली में लंबे प्रवास तथा बीजेपी नेताओं के साथ उनकी कथित बैठकों के बाद इन अटकलों को बल मिला है। 

बिहार चुनाव के दौरान बढ़ी खटास

इससे पहले, बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान झामुमो ने राज्य की एक भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने की घोषणा की थी। पार्टी ने कांग्रेस और आरजेडी पर राजनीतिक साजिश रचने तथा महागठबंधन में शामिल होने के बावजूद उसे सीटों से वंचित रखने का आरोप लगाया था। झामुमो ने यह भी कहा था कि वह विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में अपनी भूमिका की समीक्षा करेगी। झामुमो की इस घोषणा के कुछ हफ्तों बाद झारखंड में सियासी रहस्य गहरा गया है, खासकर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के 28 नवंबर को दिल्ली पहुंचने तथा वहां कई दिनों तक रुकने के कारण। हालांकि, दोनों झारखंड विधानसभा के पांच दिसंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के मद्देनजर बुधवार शाम रांची लौट आए। 

JMM और कांग्रेस ने बताया अफवाह

बहरहाल, झामुमो और कांग्रेस दोनों ने झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में तनाव तथा राज्य में संभावित सियासी बदलाव की अटकलों को अफवाह करार देते हुए खारिज किया है। कांग्रेस विधायक और प्रदेश के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा, “इसमें (राज्य में सियासी उथल-पुथल की अटकलों में) कोई सच्चाई नहीं है।” उन्होंने कहा, “(झारखंड विधानसभा में) विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के पास 56 सीटें हैं। बिहार चुनाव में सीट नहीं मिलना बहुत मामूली बात है। हम इसकी समीक्षा कर रहे हैं।” किशोर ने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि झारखंड में राजकोषीय संकट के कारण गठबंधन समीकरणों में बदलाव की जरूरत को बल मिल रहा है। 

अटकलें पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद 

एक अन्य कांग्रेस विधायक एवं मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, “अटकलें पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं। भाजपा अफवाह फैलाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने भाजपा के सामने झुकने के बजाय जेल जाना पसंद किया। झारखंड की जनता ने गठबंधन को एक मजबूत और एकतरफा जनादेश दिया, जो दृढ़ता के साथ राज्य पर शासन करेगा।” कांग्रेस की झारखंड इकाई के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भाजपा पर राज्य में सियासी बदलाव की अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “(झारखंड में विधानसभा) चुनाव से पहले छह महीने तक सलाखों के पीछे रहे मुख्यमंत्री को शानदार जीत मिली। वह भाजपा के साथ क्यों जाएंगे?” 

महागठबंधन में सब कुछ ठीक

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने महागठबंधन में दरार की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “महागठबंधन में सब कुछ ठीक है। गठबंधन के सभी सहयोगी एकजुट हैं। यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।” सोरेन के दिल्ली दौरे पर कमलेश ने कहा कि यह “बकाया केंद्रीय निधि” और राज्य के विकास से सिलसिले में था। वहीं, झामुमो ने कहा कि यह दौरा “परिवार में किसी चिकित्सा स्थिति के कारण” था, जबकि पार्टी सूत्रों ने कहा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े मामलों के सिलसिले में वकीलों की सलाह भी ली। 

झारखंड न झुका है और न झुकेगा

झामुमो प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल सारंगी ने राज्य में सियासी बदलाव की अटकलों को खारिज करते हुए कहा, “झारखंड न झुका है और न झुकेगा।” झारखंड में सियासी बदलाव की अटकलों को इन दावों से और हवा मिल गई कि सोरेन दंपती ने राष्ट्रीय राजधानी में एक वरिष्ठ भाजपा नेता से मुलाकात की, जबकि राज्यपाल संतोष गंगवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 81 सदस्यीय विधानसभा में सीटों का गणित भी अटकलों को हवा दे रहा है। झामुमो के पास 34 विधायक हैं और उसे बहुमत के लिए महज सात और सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं और ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सोरेन के नेतृत्व में “भाजपा के समर्थन वाली और कांग्रेस रहित सरकार के गठन के लिए” पार्टी के कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। हालांकि, ऐसे परिदृश्य में अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम 11 कांग्रेस विधायकों को दल बदलने की जरूरत होगी।भाजपा ने अपनी ओर से गठबंधन की किसी भी संभावना से इनकार किया है। (इनपुट-भाषा)

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