हो सकता है कि आप समय पर काम पूरे कर रहे हों, फ़ैसले ले रहे हों और अपनी रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपका शरीर तनाव का अच्छी तरह सामना कर रहा है। न्यूरोसर्जन डॉ. जय जगन्नाथन के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव अक्सर सामने ही छिपा रहता है और साफ़ लक्षण दिखने से बहुत पहले ही चुपचाप दिमाग और शरीर पर असर डालता है। 13 जुलाई की एक इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने बताया कि लंबे समय तक रहने वाले तनाव को नज़रअंदाज़ क्यों नहीं करना चाहिए।
लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में क्या होता है?
डॉ. जगन्नाथन ने बताया कि जब शरीर तनाव महसूस करता है, तो सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम और हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल एक्सिस एक्टिवेट हो जाते हैं। "दबाव का तेज़ी से सामना करने के लिए शरीर कोर्टिसोल और कैटेकोलामाइन का रिलीज़ बढ़ा देता है। कम समय के लिए यह तरीका फ़ायदेमंद होता है। समस्या तब शुरू होती है जब यह बहुत लंबे समय तक एक्टिव रहता है। उनके अनुसार, लंबे समय तक सक्रिय रहने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर धीरे-धीरे असर पड़ सकता है, जैसे ध्यान और याददाश्त, नींद का पैटर्न, दर्द का एहसास,मांसपेशियों का तनाव (मसल टोन), दिल की धड़कन, भावनाओं पर प्रतिक्रिया लोग अक्सर इन लक्षणों को अलग-अलग देखते हैं और उन्हें आपस में नहीं जोड़ते।
तनाव को अक्सर क्यों नजरअंदाज किया जाता है?
डॉ. जगन्नाथन ने बताया कि लोग अक्सर इन लक्षणों को अलग-अलग महसूस करते हैं और उन्हें यह पता नहीं चलता कि ये सभी लक्षण एक ही मूल कारण से हो सकते हैं। खराब नींद के लिए शेड्यूल को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है। सिरदर्द के लिए थकान को ज़िम्मेदार माना जाता है। चिड़चिड़ेपन के लिए पर्सनैलिटी को ज़िम्मेदार माना जाता है। ध्यान लगाने में मुश्किल के लिए काम के भारी बोझ को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन हो सकता है कि ये सभी लक्षण लंबे समय से चले आ रहे तनाव की प्रतिक्रिया से जुड़े हों। कड़वा सच यह है कि स्ट्रेस में भी काम कर पाने का मतलब यह नहीं है कि आपका शरीर बिना किसी बुरे असर के इसे झेल रहा है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)