इन दिनों गूगल पर बंगाल चुनाव से ज्यादा झालमुड़ी सर्च किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान झालमुड़ी क्या खाई, भारत समेत पड़ोसी देशों में लोग झालमुड़ी का स्वाद, झालमुड़ी का मतलब और झालमुड़ी की रेसिपी खोजने में लगे हुए हैं। बंगाल और बिहार के लोग भले ही झालमुड़ी जानते हों, लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें इसके नाम का मतलब नहीं पता है। आइये जानते हैं झालमुड़ी क्या है और झालमुड़ी का मतलब क्या होता है। बंगाल की झालमुड़ी क्यों फेमस है?
झालमुड़ी क्या है?
झालमुड़ी मुरमुरे, सरसों के तेल, मसाले और कुछ नमकीन के साथ तैयार किया जाने वाला हल्का नाश्ता है। लोग इसे चाय के साथ या शाम को हल्के फुल्के नाश्ते के रूप में खाना पसंद करते हैं। बस, ट्रेन और गली मोहल्ले में झालमुड़ी बेचने वाले खूब दिख जाएंगे। 10-20 रुपए में झालमुड़ी मिल जाती है। इसलिए इसे गरीब भी आसानी से खा सकते हैं। गर्मी में पेट भरने के लिए लोग झालमुड़ी खाना पसंद करते हैं।
झालमुड़ी का मतलब क्या है?
झालमुड़ी दो शब्दों से मिलकर बना नाम है। बंगाल में 'झाल' का अर्थ है मसालेदार और 'मुरी' का अर्थ है मुरमुरे। दोनों को मिलाकर इसका शाब्दिक अर्थ है 'मसालेदार मुरमुरे', जो बिल्कुल सही है।
बंगाल की झालमुड़ी क्यों फेमस है?
कोलकाता की गलियों में घूमते हुए आपको झालमुड़ी का स्वाद चखने को मिल जाएगा। यहां गली मोहल्ले में लोग बर्तन में झालमुड़ी मिलाते, उछालते और पुराने अखबारों में परोसते हुए दिख जाएंगे। बंगाल में चावल की ज्यादा खाए जाते हैं और पैदा होते हैं। यहां चावल से अलग-अलग तरह की डिश बनाकर खाई जाती हैं। वैसे भारत में चावल से तैयार मुरमुरे सदियों से खाए जा रहे हैं। लेकिन माना जाता है कि इसे मसालों के साथ नया रूप औपनिवेशिक काल में बंगाल में दिया गया। समय के साथ झालमुड़ी इसका नाम पड़ा और ये बंगाल के तीखे स्वादों और गली-मोहल्ले में बिकने वाला नाश्ता बन गया। खास बात ये है कि झालमुड़ी झटपट, सस्ता और बेहद स्वादिष्ट नाश्ता है। सिर्फ भारतीय ही नहीं अंग्रेज भी झालमुड़ी का स्वाद खूब पसंद करते थे। आज भी लंदन की गलियों में आपको झालमुरी खाने को मिल जाएगी।
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