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भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी की कहानी, हर महिला के लिए बन सकती है इंस्पिरेशनल

 Written By: Vanshika Saxena
 Published : Mar 08, 2025 07:36 am IST,  Updated : Mar 08, 2025 07:36 am IST

आनंदी गोपाल जोशी ने देश की पहली महिला डॉक्टर बनकर भविष्य की सभी महिलाओं के लिए मेडिकल क्षेत्र में आने का रास्ता खोला। आइए इनकी मोटिवेशनल कहानी के बारे में जानते हैं।

आनंदी गोपाल जोशी- India TV Hindi
आनंदी गोपाल जोशी Image Source : SOCIAL

आज यानी 8 मार्च के दिन को हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश-दुनिया की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में बुलंदियों का मुकाम हासिल कर रही हैं। लेकिन कुछ महिलाओं की सफलता की कहानी के बारे में जानकर हर महिला को सफलता हासिल करने की प्रेरणा मिल सकती है। ऐसी ही एक महिला का नाम है आनंदी गोपाल जोशी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आनंदी गोपाल जोशी भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी थीं।

9 साल की उम्र में हो गई थी शादी

आनंदी गोपाल जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 को पुणे में हुआ था। आनंदी की महज 9 साल की उम्र में शादी हो गई थी। आनंदी के पति गोपालराव उनसे 16 साल बड़े थे। आपको बता दें कि 14 साल की उम्र में ही आनंदी मां बन गई थीं लेकिन महज 10 ही दिन के बाद उनके बच्चे की गंभीर बीमारी की वजह से मौत हो गई। इसी दुर्घटना के बाद आनंदी ने दृढ़ निश्चय किया कि वो किसी भी बच्चे को बीमारी से मरने नहीं देंगी।

अमेरिका से हासिल की डिग्री

आनंदी गोपाल जोशी की डॉक्टर बनने की इच्छा को उनके पति गोपालराव ने सपोर्ट किया। गोपालराव ने अपनी पत्नी आनंदी को मिशनरी स्कूल भेजकर उनकी पढ़ाई शुरू करवाई। 1880 में गोपालराव ने एक पॉपुलर अमेरिकी मिशनरी को लेटर लिखकर अमेरिका में डॉक्टरी की पढ़ाई की जानकारी हासिल की। परिवार वालों और समाज की असहमति के बावजूद आनंदी ने अपने पति के समर्थन की वजह से अपने सपने को पूरा किया। आपको बता दें कि आनंदी ने अपने सारे गहने बेचकर पेंसिल्वेनिया के महिला मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।

19 साल की उम्र में मारी बाजी

आपको जानकर हैरानी होगी कि आनंदी ने महज 19 साल की उम्र में एमडी की डिग्री हासिल की। आनंदी पहली भारतीय महिला थीं, जिसे ये डिग्री मिली। आनंदी बाई भारत लौटकर कोल्हापुर रियासत के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल के महिला वार्ड में डॉक्टर इन-चार्ज की पोस्ट पर अपॉइंट हुईं। आनंदी बाई की कहानी ये सीख देती है कि अगर आप अपने सपने को हासिल करने के लिए दृढ़ निश्चय कर लें, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। डॉक्टरी की प्रैक्टिस के दौरान ही आनंदी बाई टीबी की शिकार हो गईं जिसकी वजह से 26 फरवरी 1887 में उनका निधन हो गया।

 

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