हमारी दादी-नानी सेहत से जुड़ी कई जरूरी बातें बताया करती थीं। हालांकि, कई बार वो उनके कारणों और साइंटिफिक तथ्यों को तो नहीं बता पाती थीं लेकिन, उनकी बातें बिलकुल सही होती थीं। जी हां, ऐसी ही एक पुरानी कहावत रही है पानी बैठकर पीना चाहिए (Drinking water while sitting) और दूध खड़े होकर (benefits drinking milk standing in hindi)। जी हां, आपने भी यह कहावत सुनी होगी। लेकिन, क्या आपने इसके पीछे के साइंस और तथ्यों के बारे में जानने की कोशिश की है? नहीं तो, आइए हम आपको बताते हैं इन दोनों ही चीजों के पीछे का साइंटिफिक तथ्य।
पानी बैठकर पीने से आपकी मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को काफी आराम मिलता है और नसों को भोजन और अन्य तरल पदार्थों को आसानी से पचाने में मदद मिलती है। बैठने के दौरान आपके गुर्दे भी फिल्ट्रेशन का काम आसानी से करते हैं। साथ ही इससे आपकी हड्डियों पर जमा कैल्शियम का क्षरण नहीं होता।
अगर आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो इससे अल्सर और सीने में जलन हो सकती है। इसका कारण यह है कि आप जो तरल पदार्थ पीते हैं वो डाइजेस्टिव एंजाइम और पेट के एसिड को धो देता है। नतीजतन, खाना नहीं पचेगा और एसिड जूस बढ़ेगा और आपको जलन महसूस होगी। इसके अलावा खड़े होकर पानी पीने से शारीरिक तरल पदार्थ संतुलित नहीं हो पाते हैं, जिससे जोड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं और गठिया (arthritis) हो सकता है।
दूध खड़े होकर पीना चाहिए (how to drink milk standing or sitting in hindi)। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप खड़े हैं, तो आपके दूध का कैल्शियम आपके शरीर तक पहुंचता है। ये आपके ब्लड सर्कुलेशन के जरिए तेजी से आपके शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंच जाता है, जो दूध के हर पोषक तत्व को अवशोषित कर लेता है। इससे आपको दूध का पोषण मिल जाता है।
दूसरी ओर, जब आप बैठे होते हैं, क्योंकि दूध के बहाव में व्यवधान होता है, तरल पदार्थ आपके अन्नप्रणाली के निचले हिस्से के आसपास जमा हो जाएगा। फिर ये गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स सिंड्रोम या जीईआरडी का कारण बन सकता है।
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