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बोलने से पहले शब्दों का हमेशा रखें ध्यान, पल भर में किसी को भी पहुंचा सकता है चोट

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Jun 24, 2021 06:10 am IST,  Updated : Jun 24, 2021 06:10 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti-चाणक्य नीति- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार शब्दों पर आधारित है। 

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'शब्द भी एक भोजन है। शब्द शब्द का भी एक स्वाद है। बोलने से पहले चख लीजिए। स्वयं को अगर अच्छा ना लगे तो दूसरों को मत परोसिए।' आचार्य चाणक्य 

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि किसी से भी बात करते वक्त इस बात का ध्यान रखिए कि आप उससे किस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जो शब्द आपको सुनने में खुद अच्छे ना लगे वो दूसरों को कैसे अच्छे लग सकते हैं।

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असल जिंदगी में अक्सर ऐसा होता है कि मनुष्य दूसरों से बात करते वक्त अपने शब्दों पर ध्यान नहीं देता। उसे ऐसा लगता है कि जिन शब्दों का चुनाव उसने किया है वो एकदम ठीक है। लेकिन कई बार वो ये भूल जाता है जिन शब्दों का वो इस्तेमाल बिना सोचे समझे कर रहा है वो दूसरों को तकलीफ दे सकता है। 

कई बार आपको खुद ये एहसास नहीं होता कि आप जिन शब्दों का चुनाव कर रहे हैं वो दूसरों को तकलीफों से भर सकता है। हमेशा इस बात का ध्यान रखिए कि जो शब्द आप इस्तेमाल कर रहे हैं दूसरों के लिए अगर वो आपके लिए कोई इस्तेमाल करें तो आपको कैसा लगेगा। अगर ये शब्द आपको सुनने में कड़वे लगेंगे तो दूसरों को ऐसे शब्द खराब लगना स्वाभाविक है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि शब्द भी एक भोजन है। शब्द शब्द का भी एक स्वाद है। बोलने से पहले चख लीजिए। स्वयं को अगर अच्छा ना लगे तो दूसरों को मत परोसिए।

 

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