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आचार्य चाणक्य की इन 4 बातों को जीवन में उतार लें जरूर, तभी मुश्किलें होंगी कम

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Sep 08, 2021 06:14 am IST,  Updated : Sep 08, 2021 06:14 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

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chanakya niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का विचार इस बात पर आधारित है कि मनुष्य को किन चीजों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। 

मनुष्य को हमेशा इस बात का रखना चाहिए ध्यान, वरना सब कुछ खोना तय

'प्रशंसा से पिघलना मत, क्रोध से जलना मत, आचोलना से उबलना मत और शब्दों से फिसलना मत।' आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि मनुष्य को हमेशा इन 4 बातों को ध्यान में रखना चाहिए। पहली बात- प्रशंसा से पिघलना मत, दूसरा- क्रोध से जलना मत, तीसरा- आलोचना से उबलना मत और चौथा शब्दों से फिसलना मत। आचार्य ने अपने इन कथन में इस बात का जिक्र किया है कि मनुष्य को अपने जीवन में किसी भी हाल में इन बातों को याद रखना चाहिए। ऐसा करके ही वो अपने जीवन में आने वाली मुसीबतों को कम कर सकता है।

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सबसे पहले बात करते हैं प्रशंसा से पिघलना मत। आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि मनुष्य को कभी भी किसी से भी अपनी तारीफ सुनकर उसकी बातों में नहीं आ जाना चाहिए। अक्सर ऐसा होता है कि सामने वाला आपकी थोड़ी सी भी तारीफ कर दे तो आप उससे वो बातें भी शेयर देते हैं जिसे आपने अब तक किसी से नहीं कहा था। हो सकता है कि सामने वाला आपकी इस बात का फायदा उठाकर आपको चोट पहुंचाए। इसलिए जब भी कोई आपकी तारीफ करें तो खुश जरूर हों, लेकिन अपने दिमाग का भी इस्तेमाल जरूर करें।

दूसरा है- क्रोध से जलना मत। मनुष्य को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए। अगर आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आता है या फिर आप बहुत गुस्सा करते हैं तो वो आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। गुस्से से आप सिर्फ अपना नुकसान करेंगे और किसी का नहीं।

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तीसरा है- आचोलना से उबलना मत। अगर आपकी कोई बुराई या फिर आलोचना करें तो आप उससे परेशान ना हो। आलोचना करने वाला जो कर रहा है उसे करने दें। आप किसी को ऐसा करने से रोक नहीं सकते। लेकिन आप इतना जरूर कर सकते हैं कि उस वक्त आप चुप रहें और गुस्से में अपना नियंत्रण ना खोएं।

चौथा है- शब्दों से फिसलना मत। किसी की भी बातों में अगर आप आसानी से आ जाते हैं तो अपने आपको थोड़ा बदलें। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह के स्वभाव से कोई भी आपको नुकसान पहुंचा सकता है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि जिंदगी में अगर आपको मुसीबतों को कम करना है तो उपरोक्त 4 बातों को ध्यान में रखें।

 

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