Pradosh Vrat 2022: प्रदोष व्रत में शिवजी करते हैं हर इच्छा पूरी, जानिए रवि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat 2022: प्रदोष व्रत की पूजा त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल के समय की जाती है। इसके आलावा जिस दिन प्रदोष होता है उस दिन के हिसाब से प्रदोष व्रत का नाम रखा जाता है |

Sushma Kumari Edited by: Sushma Kumari @ISushmaPandey
Updated on: June 11, 2022 12:29 IST
Pradosh Vrat 2022- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Pradosh Vrat 2022

Highlights

  • इस बार रवि प्रदोष व्रत 12 जून को पड़ रहा है।
  • प्रदोष व्रत एक महीने में दो बार करने का विधान है

Pradosh Vrat 2022: प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। प्रदोष व्रत एक महीने में दो बार करने का विधान है- पहला कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदाशी को।  हर प्रदोष में भगवान शंकर की पूजा की जाती है। इस बार रवि प्रदोष 12 जून को किया जाएगा। 

आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार रात्रि के प्रथम प्रहर को यानि सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। कहते हैं इस दिन जो व्यक्ति भगवान शंकर की पूजा करता है और किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है,वह सभी पापकर्मों से मुक्त होकर पुण्य को प्राप्त करता है और उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन रात के पहले प्रहर में शिवजी को कुछ न कुछ भेंट अवश्य करना चाहिए।

प्रदोष व्रत की पूजा त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल के समय की जाती है। इसके आलावा जिस दिन प्रदोष होता है उस दिन के हिसाब से प्रदोष व्रत का नाम रखा जाता है | इस बार रविवार को पड़ने वाले प्रदोष को रवि प्रदोष के नाम से जाना जाता है। 

प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

रवि प्रदोष शाम 07:19 बजे से रात 09:20 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।  इस रात रवि योग 11:58 बजे से अगली सुबह 05:23 तक है। 

रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर भगवान शिव का स्मरण करते हुए इस व्रत का संकल्प करें।
  • शाम को सूर्यास्त होने के एक घंटे पहले स्नान करके सफेद कपडे पहनें। 
  • इसके बाद ईशान कोण में किसी एकांत जगह पूजा करने की जगह बनाएं। 
  • इसके लिए सबसे पहले गंगाजल से उस जगह को शुद्ध करें फिर इसे गाय के गोबर से लिपें। 
  • अब पद्म पुष्प की आकृति को पांच रंगों से मिलाकर चौक को तैयार करें। 
  • इसके बाद आप कुश के आसन में उत्तर-पूर्व की दिशा में बैठकर भगवान शिव की पूजा करें। 
  • भगवान शिव का जलाभिषेक करें साथ में ऊं नम: शिवाय: का जाप भी करते रहें। 
  • इसके बाद बेल पत्र, गंध, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग व इलायची चढ़ाएं। 
  • शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें।
  •  शिवजी का षोडशोपचार पूजा करें, जिसमें भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें। 
  • भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।
  • आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। 
  • शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जाप करें। रात्रि में जागरण करें।

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