इस्लामाबाद: मुम्बई आतंकी हमले के सरग़ने ज़कीउर रहमान लखवी की शुक्रवार को रिहाई के कुछ घंटे पहले एक पाकिस्तानी अख़बार ने अपनी सरकार की जमकर आलोचना की और कहा कि वह लखवी को अपराधी साबित करने में बुरी तरह विफल रही है।
लाहोर हाई कोर्ट ने गुरुवार को लखवी को रिहा करने का आदेश दिया था। दैनिक दि नैशन ने शुक्रवार को अपने संपादकीय में लिखा कि लखवी-गाथा जहां से शुरु हुई थी वापस वही पहुमच गई।
"सरकार एक बार फिर लखवी को अपराधी साबित करने में बुरी तरह नाकाम रही है। वह न सिर्फ नाकाम रही बल्कि लगता है कि इस बार उसने पुरज़ोर कोशिश भी नहीं की।“
"अगर लखवी अपराधी साबित हो जाता तो एक ऐसा आमूलचूल परिवर्तन आता जिसकी उग्रवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में इस देश को सख़्त ज़रुरत है।"
संपादकीय में लिखा कि लखवी के मामले में विफलता के बाद अब आतंकवाद के ख़िलाफ पाकिस्तानी नेताओं के तमाम भाषण खोखले नज़र आते हैं।
2008 में मुम्बई आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे।
"ये पाखण्ड लोगों की समझदारी का मज़ाक है।"
"कभी अभियुक्त, कभी जज तो कभी गवाहों की सुरक्षा कारणों से अदालत में ग़ैरमौजूदगी की वजह से मुक़दमा बरसों लटका रहा।'
"ये हैरान करने वाली बात है कि सरकार बग़ैर किसी अड़चन के अग्रवाद के खिलाफ लड़ाई के बीच पारंपरिक सैनिक परैड तो आयोजित कर सकती है लेकिन अदलत में सुनवाई के लिए सुरक्षा नहीं दे सकती।"
अखबार ने जेल में लखवी के ठाठ के बारे में भी लिखा और कहा कि उसे टीवी और इंटरनेट की सुविधा थी और उसके कई कमरे थे और मेल मिलाप का कोई समय निर्धारित नहीं था।
अखबार ने आगे लिखा "अगर 132 बच्चों की मौत (पेशावर में स्कूल पर आतंकी हमला) से सरकार की आंख नहीं खुलती तो फिर जाने किससे खुलेगी।."