Wednesday, March 18, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. मध्य-प्रदेश
  3. VIDEO: इंदौर में हिंदू परिवार के साथ ईद की नमाज पढ़ने ईदगाह पहुंचे काजी, 35 सालों से चली आ रही परंपरा

VIDEO: इंदौर में हिंदू परिवार के साथ ईद की नमाज पढ़ने ईदगाह पहुंचे काजी, 35 सालों से चली आ रही परंपरा

Edited By: Swayam Prakash @swayamniranjan_ Published : Apr 11, 2024 06:02 pm IST, Updated : Apr 11, 2024 06:03 pm IST

इंदौर में ईद के मौके पर हिंदू परिवार के लोग शहर काजी को बग्घी में बिठाकर नमाज की ईद अदा करने के लिए ईदगाह लेकर पहुंचे हैं। 35 सालो से चली आ रही इस परंपरा का वीडियो भी सामने आया है।

Indore- India TV Hindi
Image Source : VIDEO GRAB बग्घी में काजी को बिठाकर ईदगाह ले जाता सलवाड़िया परिवार

मध्य प्रदेश के इंदौर में ईद का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। ईद के मौके पर इंदौर में गंगा जमुनी तहजीब देखने को मिलती है। इस साल ईद-उल-फितर से जुड़ी सांप्रदायिक सद्भाव की एक अनूठी परंपरा, जो यहां 35 साल पहले शुरू हुई, इस परंपरा को आज भी जीवित रखा गया है। हर बार की तरह इस साल भी हिंदू परिवार के लोग शहर काजी को बग्गी में बिठाकर ईद की नमाज अदा करने के लिए ईदगाह लेकर पहुंचे हैं। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें शहर काजी और सलवारिया परिवार के सदस्या साथ ईदगाह जाते दिख रहे हैं।

हिंदू मुस्लिम दंगों के बाद शुरू हुई परंपरा

दरअसल, शहर में हिंदू मुस्लिम दंगों के बाद एकता भाईचारे की ये परंपरा शुरू हुई थी। 1990 से पहले हुए दंगों के बाद ही शहर का सलवारिया परिवार शहर काजी को बग्गी में राजमोहल्ला से बिठाकर ईदगाह सदर बाजार लेकर पहुंचता है और नमाज अदा होने के बाद बग्गी से ही राजमोला घर तक छोड़ा जाता है। यहां एक दूसरे को सिवईया खिलाकर ईद की बधाई दी जाती है। बताया जाता है कि स्वर्गीय रामचंद्र सलवाडिया ने इस परंपरा की शुरुआत की थी।

शहर काजी ने क्या कहा?

वहीं इस मौके पर शहर काजी इरशाद अली ने ईद के मौके पर बताया कि दुनिया दो तरह के चश्मों से देखती है। एक सियासत का चश्मा है जहां हिंदू और मुस्लिम हमेशा लड़ते रहते हैं और दूसरा सलवाडिया परिवार है जहां एकता और भाईचारे के साथ गंगा जमुना की तहजीब बरसती है। शहर काजी मोहम्मद इशरत अली ने बताया, "मेरे पिता मोहम्मद याकूब अली भी शहर काजी थे। वर्ष 1990 में उनके इंतकाल से पहले, ईद के मौके पर सलवाड़िया परिवार उन्हें भी घर से पूरे सम्मान के साथ बग्गी पर बैठाकर ईदगाह ले जाता और वापस छोड़ता था।" शहर काजी ने कहा कि इंदौर के मूल मिजाज में कौमी एकता और भाईचारा है और सलवाड़िया परिवार की परंपरा इसकी खूबसूरत मिसाल पेश करती है। 

ईदगाह पहुंचते हैं जनप्रतिनिधि और आलाधिकारी

वहीं बेटे सत्यनारायण सलवाड़िया ने बताया, "वर्ष 2017 में  पिता के निधन के बाद यह परंपरा मैं निभा रहा हूं।" बता दें कि ईद उल फितर के मौके पर तमाम जनप्रतिनिधि और आलाधिकारी भी ईदगाह पर पहुंचते हैं। इस दौरान शहर काजी की नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे को बधाई देकर ईद का पर्व मनाया जाता है।

(रिपोर्ट- भारत पाटिल)

ये भी पढ़ें-

 

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। मध्य-प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement