उज्जैन के महाकाल मंदिर में विवाद करने वाले पुजारी और महंत की वीआईपी मार्ग से एंट्री बैन कर दी गई है। बुधवार को परंपरा के पालन को लेकर मंदिर के पुजारी और नाथ सम्प्रदाय के संत के बीच विवाद हो गया था। गर्भगृह में शुरू हुआ विवाद मंदिर के बाहर तक पहुंच गया। बताया जाता है कि इस दौरान साधु ने पुजारी को अपशब्द कहे, इससे नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की।
शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर मंदिर समित ने महेश पुजारी और नाथ संप्रदाय के संत योगी महावीर नाथ को सजा सुनाई है। दोनों अगले 15 दिन तक वीआईपी मार्ग से प्रवेश नहीं कर पाएंगे। अब पुजारी और संत दोनों दर्शन करने के लिए आम श्रद्धालु की तरह कतार में लगेंगे और दर्शन करने के बाद मंदिर से बाहर चले जाएंगे।
कैसे हुआ विवाद?
बुधवार सुबह आठ बजे के आसपास महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी गर्भगृह में मौजूद थे। इस दौरान नाथ सम्प्रदाय से जुड़े महंत योगी महावीरनाथ गर्भगृह में जल चढ़ाने गए। पुजारी ने साधु से मंदिर की धर्म परंपरा का पालन करते हुए पगड़ी नहीं पहनकर आने को कहा। ऐसे में साधु और पुजारी के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और यह विवाद गलियों में तब्दील हो गया। दोनों गर्भगृह से नंदीहाल पहुंचे यहां भी विवाद होता रहा। दोनों एक दूसरे को धक्का देते दिखे। इस दौरान मंदिर में मौजूद कर्मचारी व अन्य लोगों ने विवाद शांत कराया।
पुजारी और महंत ने की शिकायत
विवाद ने आंदोलन का रूप ले लिया महेश पुजारी के साथ उनके साथियों ने मंदिर प्रशासक और मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपा व संत पर कार्रवाई की मांग की। वहीं, दूसरी और पुजारी के खिलाफ संत समाज एक हो गया। कलेक्टर, मंदिर प्रशासक व मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर इन्होंने भी ज्ञापन दिया व पुजारी के निष्कासन की मांग की। इस घटनाक्रम के बाद मामले में जांच शुरू हुई। तीन सदस्यी जांच समिति ने अपना आरंभिक जांच प्रतिवेदन मंदिर प्रशासक को सौंपा इसके बाद मन्दिर समिति ने 15 दिन के निष्कासन का निर्णय लिया।
किसी भी पूजा-पाठ में भाग नहीं लेंगे पुजारी-महंत
मामले की जानकारी देते हुए प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों का आचरण मंदिर की गरिमा के विपरीत पाया गया है। इसी आधार पर पुजारी महेश शर्मा और महंत योगी महावीर नाथ पर 15 दिनों के लिए मंदिर में विशिष्ट मार्गो से प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस दौरान दोनों लोग गर्भगृह या नंदी हॉल में नही जा सकेंगे। विशेष मार्गों से प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण, इस अवधि में वे किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ में भाग नहीं ले सकेंगे।
सिर्फ दर्शन करने का अवसर मिलेगा
प्रशासक ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के उपरांत ही दोनों यथावत दर्शन या पूजा का अवसर प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई जांच दल के प्रारंभिक प्रतिवेदन के आधार पर की गई है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भविष्य में ऐसी घटना होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
(उज्जैन से प्रेम डोडिया की रिपोर्ट)