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'पति से संबंध बनाने से इनकार, विवाहेत्तर संबंध रखने का संदेह करना तलाक का आधार': हाई कोर्ट

 Published : Jul 18, 2025 04:00 pm IST,  Updated : Jul 18, 2025 04:20 pm IST

हाई कोर्ट ने महिला की उस याचिका को खारिज किया है, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला के आचरण को उसके पति के प्रति ‘क्रूरता’ माना जा सकता है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

मुंबई हाई कोर्ट ने एक फैमिली कोर्ट के तलाक संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली महिला को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना और उस पर विवाहेत्तर (शादी के बाहर) संबंध रखने का संदेह करना क्रूरता है। इसलिए यह तलाक का आधार है। जज रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले की खंडपीठ ने गुरुवार को कहा कि महिला के आचरण को उसके पति के प्रति ‘क्रूरता’ माना जा सकता है। 

फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती

कोर्ट ने महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। उक्त आदेश में पति की तलाक याचिका को मंजूरी दी गई थी। महिला ने याचिका में अपने पति से एक लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता दिलाने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था। 

साल 2013 में हुई शादी, 2014 में रहने लगे अलग

इस जोड़े की शादी साल 2013 में हुई थी, लेकिन दिसंबर 2014 में वे अलग रहने लगे। साल 2015 में पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए पुणे की परिवार अदालत का रुख किया, जिसे मंजूरी मिल गई। महिला ने अपनी याचिका में कहा कि उसके ससुराल वालों ने उसे परेशान किया था, लेकिन वह अब भी अपने पति से प्यार करती है और इसलिए वह विवाह संबंध खत्म नहीं करना चाहती। 

शर्मिंदा कर दी गई मानसिक पीड़ा

हालांकि, व्यक्ति ने कई आधार पर क्रूरता का आरोप लगाया, जिसमें (महिला के) शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना, उस पर (पति पर) विवाहेत्तर संबंध रखने का संदेह करना और उसके (व्यक्ति के) परिवार, दोस्तों और कर्मचारियों के सामने उसे शर्मिंदा कर मानसिक पीड़ा पहुंचाना शामिल है। व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी पत्नी ने उसे उस वक्त ही छोड़ दिया था, जब वह उसका घर छोड़कर अपने मायके चली गई। 

सुधार होने की कोई संभावना नहीं - कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा, ‘अपीलकर्ता (महिला) का व्यक्ति के कर्मचारियों के साथ व्यवहार निश्चित रूप से उसे पीड़ा पहुंचाएगा। इसी तरह, व्यक्ति को उसके दोस्तों के सामने अपमानित करना भी उसके प्रति क्रूरता है।’ कोर्ट ने कहा कि महिला का उस व्यक्ति की दिव्यांग बहन के साथ उदासीन व्यवहार भी निश्चित रूप से उसे और उसके परिवार के सदस्यों को पीड़ा पहुंचाएगा। कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि दंपति के बीच विवाह संबंध टूट चुका है और इसमें सुधार होने की कोई संभावना नहीं है। (भाषा के इनपुट के साथ)

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