कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव के बैकग्राउंड में शिवसेना शिंदे ग्रुप ने एक बार फिर अपनी ताकत साबित की है। यहां पार्टी के चार उम्मीदवारों के बिना विरोध के जीतने का रास्ता साफ हो गया है। सभी इंडिपेंडेंट उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना का साफ दबदबा दिख रहा है। पॉलिटिकल गलियारों में चर्चा है कि इन घटनाक्रमों के पीछे विधायक श्रीकांत शिंदे का पॉलिटिकल दांव अहम था।
विपक्षी उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से यह साफ हो गया है कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पैनल नंबर 24 से शिवसेना के तीन उम्मीदवार, रमेश म्हात्रे, विश्वनाथ राणे और वृषाली रंजीत जोशी, बिना विरोध के जीतेंगे। चूंकि इस पैनल के सभी इंडिपेंडेंट उम्मीदवारों ने अपने एप्लीकेशन वापस ले लिए हैं, इसलिए शिवसेना की जीत पक्की मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि यह लोकल लेवल पर शिवसेना की ऑर्गेनाइजेशनल ताकत, उसके वर्करों की एकता और अपनी लीडरशिप पर भरोसे का नतीजा है।
पैनल नंबर 28 में भी एक सीट पर जीत पक्की
पैनल नंबर 28-ए से शिवसेना के उम्मीदवार हर्षल राजेश मोरे भी बिना विरोध के जीतने वाले हैं। इस वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से शिवसेना की राह आसान हो गई है। एक ही समय में चार उम्मीदवारों का बिना विरोध के जीतना शिवसेना के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि इस सफलता के पीछे सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे द्वारा बनाई गई तालमेल और बातचीत की रणनीति कारगर रही है। स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ चर्चा, आश्वासन और संगठन निर्माण ने विपक्ष को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।
चुनाव में शिवसेना को शुरुआती बढ़त
शिवसेना की इस सफलता के कारण कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में पार्टी का मनोबल काफी बढ़ा है और उम्मीद जताई जा रही है कि इसका सकारात्मक असर दूसरे वार्डों में भी पड़ेगा। बिना विरोध के जीत के कारण यह साफ है कि शिवसेना ने शुरू से ही चुनाव प्रचार में बढ़त बना ली है।
(कल्याण से सुनील शर्मा की रिपोर्ट)
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