महाराष्ट्र के नागपुर में जारी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में बुधवार को तेंदुआ–मानव संघर्ष का मुद्दा अचानक केंद्र में आ गया। इसकी वजह थी जुन्नर के निर्दलीय विधायक शरद सोनवणे का अनोखा विरोध। वे तेंदुए की तरह दिखने वाला परिधान पहनकर सीधे विधान भवन पहुंच गए। उनके इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन ने राज्य में बढ़ते तेंदुआ-प्रवेश और हमलों की ओर सरकार का ध्यान खींचा। सोनवणे ने कहा कि राज्य के कई इलाकों में तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है और सरकार को इस पर तत्काल कदम उठाने चाहिए।
वन मंत्री ने सुझाया अनोखा प्रस्ताव
इसी मुद्दे पर राज्य विधानसभा में NCP (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने एक चौंकाने वाला समाधान सामने रखा। नाइक ने बताया कि उन्होंने वन अधिकारियों को जंगलों में बड़ी संख्या में बकरियां छोड़ने के निर्देश दिए हैं, ताकि तेंदुओं को पर्याप्त शिकार जंगल में ही मिल जाए और वे मानव बस्तियों की ओर न आएं।
वन मंत्री ने कहा-“अगर तेंदुए के हमले में चार लोगों की मौत होती है, तो राज्य सरकार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना पड़ता है। इसलिए मैंने अधिकारियों से कहा कि मुआवजा बांटने से बेहतर है कि एक करोड़ रुपये की बकरियां जंगल में छोड़ दें, ताकि तेंदुए गांवों की ओर रुख ही न करें।”
सत्र के दौरान माहौल गर्म
वन मंत्री के इस बयान और सोनवणे के अनोखे विरोध ने सत्र के दौरान पूरे माहौल को गर्म कर दिया है। राज्य में तेंदुआ–मानव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब सरकार के अगले कदमों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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