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नागपुर हिंसा: कोर्ट ने मुख्य आरोपियों की संपत्ति गिराने पर लगाई रोक, आदेश से पहले घर गिराने पर सरकार से मांगा जवाब

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Mar 24, 2025 11:47 pm IST,  Updated : Mar 24, 2025 11:47 pm IST

नागपुर हिंसा के आरोपियों के घर कोर्ट का आदेश आने से पहले ही गिरा दिए गए थे। इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने सरकार और नगर निगम के अधिकारियों से जवाब मांगा है।

Nagpur Violence- India TV Hindi
नागपुर हिंसा के आरोपियों पर कार्रवाई Image Source : PTI

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर हिंसा के मुख्य आरोपी फहीम खान और यूसुफ शेख सहित याचिकाकर्ता की संपत्तियों को गिराने पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले संपत्ति के मालिकों की सुनवाई न होने पर चिंता जताई। याचिकाकर्ता कथित तौर पर अवैध हिस्से के निर्माण के लिए जिम्मेदार थे। फहीम खान की संपत्ति को सोमवार दोपहर हाई कोर्ट के आदेश पारित होने से पहले ही गिरा दिया गया था। कोर्ट ने सरकार और नगर निगम अधिकारियों को जवाब देने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की है।

न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे और न्यायमूर्ति वृषाली जोशी की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कथित अवैध हिस्सों को ढहाने से पहले मकान मालिकों की बात क्यों नहीं सुनी गई। पीठ ने कहा कि यह कार्रवाई संपत्ति के मालिकों की बात सुने बिना ही दमनात्मक तरीके से की गई। 

अगली सुनवाई 15 अप्रैल को

खान की ओर से पेश हुए वकील अश्विन इंगोले ने कहा कि अदालत ने सरकार और नगर निगम अधिकारियों से जवाब मांगा है तथा मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की है। इंगोले ने दावा किया कि पीठ ने कहा है कि यदि यह निष्कर्ष निकलता है कि तोड़फोड़ अवैध रूप से किया गया था, तो प्राधिकारियों को इस नुकसान की भरपाई करनी होगी। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच नगर निगम के अधिकारियों ने सोमवार सुबह खान के घर को अनधिकृत निर्माण के कारण ढहा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट सुना चुका है आदेश

यह पहला मामला नहीं है, जब कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाई है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर आदेश पारित किया था और कहा था कि पूरे देश में इसका पालन किया जाना चाहिए। नवंबर 2024 में पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यों में कानून का राज होना चाहिए। किसी की संपत्ति मनमाने ढंग से नहीं ले सकते। अगर कोई दोषी भी है तो भी कानूनन ही घर गिरा सकते हैं। आरोपी और दोषी होना घर तोड़ने का आधार नहीं है। मनमाने ढंग से संपत्ति पर बुलडोजर चलवाने पर अधिकारी जवाबदेह होंगे। अगर किसी अधिकारी ने मनमानी अवैध कार्रवाई की तो उसे दंडित किया जाएगा। अपराध की सजा देना कोर्ट का काम है। अभियुक्तों और दोषियों के पास भी कुछ अधिकार हैं। सिर्फ आरोपी होने पर घर गिराना कानून का उल्लंघन है।

मुआवजा देने की बात

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी शख्स का मनमाने ढंग से मकान गिराया तो मुआवजा मिलना चाहिए। कानूनी प्रक्रिया के बिना बुलडोजर चलाना असंवैधानिक है। किसी एक की गलती की सजा पूरे परिवार को नहीं दे सकते। आरोपी एक है तो पूरे परिवार से घर क्यों छीना जाए? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बुलडोजर एक्शन से पहले आरोपी का पक्ष सुना जाए। नियमों के मुताबिक नोटिस जारी हो। रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजा जाए और मकान पर चिपकाया जाए। कार्रवाई से पहले 15 दिन का वक्त मिले। नोटिस की जानकारी जिलाधिकारी को भी दी जाए। आरोपी को अवैध निर्माण हटाने का मौका मिले।

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