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फेक एंकाउंटर मामले में रिटायर्ड पुलिसकर्मी को आजीवन कारावास, बॉम्बे HC ने पलटा सेशन कोर्ट का फैसला

 Edited By: Amar Deep
 Published : Mar 19, 2024 07:31 pm IST,  Updated : Mar 19, 2024 07:31 pm IST

साल 2006 में एक फर्जी मुठभेड़ के मामले में बंबई हाई कोर्ट ने रिटायर्ड पुलिसकर्मी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने रिटायर्ड पुलिसकर्मी प्रदीप शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

फेक एंकाउंटर मामले में रिटायर्ड पुलिसकर्मी को सजा।- India TV Hindi
फेक एंकाउंटर मामले में रिटायर्ड पुलिसकर्मी को सजा। Image Source : FILE

मुंबई: मुंबई के विवादास्पद ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और रिटायर्ड पुलिसकर्मी प्रदीप शर्मा को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। दरअसल, साल 2006 में मुंबई में गैंगस्टर छोटा राजन के कथित करीबी सहयोगी रामनारायण गुप्ता की फर्जी मुठभेड़ के मामले में बंबई हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा भी सुना दी है। रिटायर्ड पुलिसकर्मी प्रदीप शर्मा पर रामनारायण गुप्ता का फर्जी एनकाउंडटर करने का आरोप था। हालांकि सत्र न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

सत्र अदालत के फैसले को पलटा

हाई कोर्ट का फैसला सत्र अदालत के पहले के फैसले के बिल्कुल उलट है। क्योंकि सत्र अदालत ने प्रदीप शर्मा को पहले बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की एक खंडपीठ ने प्रदीप शर्मा को बरी करने के फैसले को गलत और नहीं टिकने लायक करार देते हुए रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि "निचली अदालत ने प्रदीप शर्मा के खिलाफ उपलब्ध पर्याप्त सबूतों को नजरअंदाज कर दिया। सबूत मामले में उनकी संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं।" 

नवंबर 2006 में हुआ था फर्जी एंकाउंटर

बता दें कि 11 नवंबर 2006 को एक पुलिस टीम ने रामनारायण गुप्ता उर्फ ​​लखन भैया को पड़ोसी वाशी से इस संदेह पर पकड़ा था कि वह राजन गिरोह का सदस्य है। उसके साथ उसके दोस्त अनिल भेड़ा को भी पकड़ा गया था। रामनारायण गुप्ता को उसी शाम पश्चिम मुंबई के उपनगरीय वर्सोवा में नाना नानी पार्क के पास एक फर्जी मुठभेड़ में मार डाला गया था। कोर्ट ने कहा कि प्रदीप शर्मा को आपराधिक साजिश, हत्या, अपहरण और गलत तरीके से कैद करने सहित सभी आरोपों में दोषी ठहराया जाता है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। पीठ ने प्रदीप शर्मा को तीन सप्ताह में संबंधित सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

(इनपुट- भाषा)

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