महाराष्ट्र के अकोला जिले के एक सरकारी अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है। इलाज के लिए अपने बीमार पति को लेकर पहुंची एक आदिवासी महिला को अस्पताल में न तो व्हीलचेयर मिली और न ही स्ट्रेचर। मजबूरन महिला को अपने पति को पीठ पर उठाकर अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकना पड़ा। महिला कंधे पर बैग और पीठ पर पति को लेकर मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों ने उसकी सहायता नहीं की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और मामले को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
वायरल वीडियो अकोला के शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय का है। महिला के साथ छोटा बच्चा भी है, उसके एक हाथ में बैग है। व्हीलचेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था, इसलिए महिला को मजबूरन पति को पीठ पर उठाना पड़ा।
किसी ने नहीं की महिला की मदद
वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला अपनी पीठ पर पति को लादे हुए है। वहीं, सामने की तरफ बैग उसके कंधे से लटक रहा है। वह अस्पताल के अलग-अलग कमरों में जाती है। इस बीच एक गार्ड उसे यह भी बताता है कि उसे किस तरफ जाना चाहिए, लेकिन मदद नहीं करता। अस्पताल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं, लेकिन कोई भी महिला को व्हीलचेयर या स्ट्रेचल लाकर नहीं देता। कोई महिला के साथ उसके पति को उठाने में भी मदद नहीं करता।
जीएमसी के डीन का बयान
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय सोनूने ने बताया कि महिला ओपीडी के समय के बाद अस्पताल पहुंची और उसने स्ट्रेचर या व्हीलचेयर के लिए अस्पताल के कर्मचारियों या रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर से संपर्क नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि इलाज कराने से पहले उसने आधार कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज भी पूरे नहीं किए। डॉ. सोनूने ने कहा कि इस घटना का इस्तेमाल संस्थान को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। डॉ. सोनूने ने कहा, "कुछ तत्वों द्वारा संस्थान को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। वीडियो में सुनाई देने वाली आवाजें लोगों से रिकॉर्डिंग न करने का अनुरोध करती हुई सुनाई दे रही हैं।"
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