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महाराष्ट्र में भी लागू होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड? विधान परिषद् में बीजेपी ने उठाया मुद्दा

 Reported By: Sachin Chaudhary, Edited By: Niraj Kumar
 Published : Mar 18, 2026 11:01 pm IST,  Updated : Mar 18, 2026 11:01 pm IST

महाराष्ट्र विधानपरिषद में बीजेपी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठाया है। बीजेपी की ओर से परिणय फूके ने यह मुद्दा उठाया। सभापति ने सरकार को इस पर जवाब देने का निर्देश दिया है।

Devendra Fadnavis- India TV Hindi
देवेंद्र फडणवीस Image Source : PTI

मुंबई: क्या महाराष्ट्र में भी उत्तराखंड की तर्ज पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाएगा? यह सवाल इसलिए लाजिमी हो जाता है क्योंकि विधान परिषद् में बीजेपी ने यह मुद्दा उठाया है। परिणय फूके  ने भारतीय जनता पार्टी  की ओर से  मांग की कि उत्तराखंड  की तर्ज़ पर महाराष्ट्र में भी Uniform Civil Code लागू किया जाए। 

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मानसून सत्र में लाया जा सकता है विधेयक

परिणय फूके  ने विधान परिषद में कहा कि संविधान की मूल भावना के अनुसार देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलना चाहिए, इसलिए सभी के लिए एक समान कानून  होना चाहिए। फूके ने कहा कि उन्होंने इस संदर्भ में सदन में औपचारिक तौर पर मुद्दा उठाया है और सभापति ने सरकार को इस पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। उनका दावा है कि यदि सरकार इस पर सकारात्मक रुख अपनाती है तो आगामी मानसून सत्र में यूसीसी से जुड़ा विधेयक लाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समान कानून लागू होने से विशेष तौर पर महिलाओं को समान अधिकार मिलने का रास्ता मजबूत होगा।

विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

वहीं, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सपा नेता रईस  शेख़  ने कहा कि राज्य में कई गंभीर मुद्दे मौजूद हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए थी। उनके अनुसार यूसीसी लंबे समय से बीजेपी का राजनीतिक मुद्दा रहा है, लेकिन इसका मसौदा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसमें क्या प्रावधान होंगे।

वहीं, शिवसेना यूबीटी के नेता भास्कर जाधव  ने कहा कि बीजेपी ने 2014 से पहले जिन मुद्दों का वादा किया था, उनमें यूसीसी भी शामिल था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तीन चुनाव बीत चुके हैं और किसी ने उन्हें रोक भी नहीं रखा है, लेकिन अब जब देश में युद्ध जैसे हालात के कारण गैस की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, तब ऐसे मुद्दे उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।जाधव का कहना है कि यूसीसी कानून लाना केंद्र सरकार का विषय है, इसलिए राज्य स्तर पर इस पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है।

उदय सामंत  ने कहा कि अगर राज्य में यूसीसी लागू करने का फैसला लिया जाता है तो इसे लागू करने की क्षमता मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस  और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे  के नेतृत्व वाली सरकार में है। उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व मिलकर करेगा।

राजनीतिक माहौल बनाने के लिए उठाया यूसीसी का मुद्दा

एनसीपी (पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने कहा कि परिणय फूके ने यह मुद्दा उठाया, लेकिन सरकार की ओर से मंत्री को स्पष्ट जवाब देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि फिलहाल यह मुद्दा केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए उठाया जा रहा है। रोहित पवार ने कहा कि यह एक तरह का “लिटमस टेस्ट” है और आने वाले चुनावों में यदि विकास का मुद्दा नहीं चलेगा तो हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए इस मुद्दे को फिर से उठाया जा सकता है।

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की   जिस तरह से इस मुद्दे को आगे बढ़ाया जा रहा है, उससे ऐसा लगता है कि संविधान को ओवररूल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यूसीसी किस आधार पर लाया जा रहा है और इसके प्रावधान क्या होंगे। पटोले ने सवाल उठाया कि क्या इस कानून से राज्य में रहने वाले मुस्लिम, क्रिश्चियन और बौद्ध समुदाय के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसे मुद्दों के बजाय किसानों की आत्महत्या और आर्थिक समस्याओं जैसे गंभीर विषयों पर ध्यान देना चाहिए।

विधान परिषद में यूसीसी को लेकर उठी इस बहस से यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में यह मुद्दा और गरमा सकता है। यदि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो आगामी मानसून सत्र में इस पर बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

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