नई दिल्ली। वैश्विक वाहन विनिर्माता भारत में बिकने वाली कारों के मामले में सुरक्षा पहलू की अनदेखी कर रही हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के एक सदस्य ने कहा कि जब तक ये कार कंपनियां पहले से मौजूद सुरक्षा सुविधाएं सुनिश्चित नहीं करती हैं तब तक दुर्घटनाएं जानलेवा बनती रहेंगी।
परिषद के सदस्य कमल सोई ने जर्मनी की लग्जरी कार कंपनी BMW-3 श्रृंखला की सेडान तथा मारुति सुजुकी की एम-800 का जिक्र खराब सुरक्षा प्रदर्शन के लिए किया। सड़क सुरक्षा पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सभी वाहन विनिर्माता चाहे वे यूरोप, जापान या अमेरिका के हैं, अब पराकाष्ठा के स्तर पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में वे भारत को डंपिंग ग्राउंड बना रहे हैं। वे भारत में पुरानी कारें डंप कर रहे हैं और सुरक्षा पहलू को नजरअंदाज कर रहे हैं।
सातवां वेतन आयोग: कार निर्माताओं को बिक्री में तेजी की उम्मीद
मारुति सुजुकी, हुंडई और होंडा जैसी प्रमुख कार निर्माता कंपनियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने से अपनी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इस साल ढाई लाख वाहन बिकने और बिक्री में 25 फीसदी वृद्धि होने की उम्मीद है।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें उनके लिए बड़ी महत्वपूर्ण हैं। उनकी कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 17 फीसदी है। करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 58 लाख पेंशनभोगियों की आय में वृद्धि होने से उन्हें कारों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
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