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कारोबारियों के लिए आएंगे अच्‍छे दिन, टैक्‍स रिटर्न के लिए भरना होगा अब केवल एक पेज का फॉर्म

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Feb 03, 2017 08:02 pm IST,  Updated : Feb 03, 2017 08:02 pm IST

emunshe.com के सीए अंकित गुप्‍ता ने केंद्रीय बजट 2017-18 के उन सभी बिंदुओं पर प्रकाश डाला है, जो कारोबारियों के चेहरे पर मुस्‍कान ला सकते हैं।

#Budget 2017: कारोबारियों के लिए आएंगे अच्‍छे दिन, टैक्‍स रिटर्न के लिए भरना होगा अब केवल एक पेज का फॉर्म- India TV Hindi
#Budget 2017: कारोबारियों के लिए आएंगे अच्‍छे दिन, टैक्‍स रिटर्न के लिए भरना होगा अब केवल एक पेज का फॉर्म

नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने एक फरवरी को अपने बजट पोटली से बिजनेस सेक्‍टर के लिए उन चीजों की घोषणा की जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। अपने चौथे बजट भाषण में पीओएस कार्ड रीडर मशीनों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर उन्‍होंने यह साफ कर दिया है कि सरकार की मंशा कालेधन पर रोक लगाने और शहर के साथ ही साथ ग्रामीण इलाकों में इलेक्‍ट्रॉनिक पेमेंट को बढ़ावा देने की है।

emunshe.com के टैक्‍स विश्‍लेषक सीए अंकित गुप्‍ता ने केंद्रीय बजट 2017-18 के उन सभी बिंदुओं पर प्रकाश डाला है, जो कारोबारियों के चेहरे पर मुस्‍कान ला सकते हैं। आइए हम भी उन बिंदुओं पर एक नजर डालते हैं:

  • किसी भी बिजनेस या पेशे से आय अर्जित न करने वाले छोटे करदाताओं के लिए अधिक सरल और एक पेज का इनकम टैक्‍स रिटर्न फॉर्म पेश किया गया है।
  • पहली बार इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने वालों का फॉर्म धारा 143 के तहत जांच के लिए नहीं चुना जाएगा।
  • 2.5 लाख से 5.0 लाख रुपए वार्षिक आय वालों के लिए इनकम टैक्‍स की दर 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है।
  • 50 लाख रुपए सालाना टर्नओवर वाली एमएसएमई कंपनियों के लिए इनकम टैक्‍स की दर 30 से घटाकर 25 फीसदी की गई है।
  • कंपनियं अब अपने नुकसान को 15 साल तक कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगी, पहले यह सीमा 10 साल थी।
  • करदाताओं के पास लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन में छूट पाने के अब कई अधिक विकल्‍प होंगे, वे पात्र बांड में निवेश कर इसका लाभ उठा सकते हैं। इसके तहत वह इनकम टैक्‍स कानून की धारा 54ईसी के तहत 50 लाख रुपए तक का फायदा ले सकते हैं।
  • कॉल सेंटर का बिजनेस करने वाले व्‍यक्ति द्वारा किए जाने वाले भुगतान पर टीडीएस की दर को मौजूदा 10 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी किया गया है।
  • इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से (एकाउंट पेयी चेक, डीडी या बैंक के जरिये ईसीएस) भुगतान स्‍वीकार करने वाले 2 करोड़ सालाना कारोबार वाले छोटे कारोबारियों के लिए प्रकल्पित टैक्‍स की दर को 8 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया गया है।
  • पेशेवरों को अब अपने एडवांस टैक्‍स का भुगतान मार्च में केवल एक किस्‍त में करना होगा, पहले तीन किस्‍तों में भुगतान की सुविधा थी।
  • प्रॉपर्टी की काउंटिंग कॉस्‍ट के लिए बेस रेट को 01.04.1981 से बदलकर 01.04.2001 कर दिया गया है, इससे निश्चित लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन कम होगा और टैक्‍स देनदारी भी घटेगी।
  • समाज के प्रत्‍येक क्षेत्र के लिए यह बजट बेहतर है, ग्रामीण सेक्‍टर पर खर्च होने वाले बजट को बढ़ाया गया है।
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