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आयुर्वेद के महत्व के प्रसार के लिए WHO से समझौता करेगा आयुष मंत्रालय

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : May 10, 2016 07:09 pm IST,  Updated : May 10, 2016 07:09 pm IST

आयुष मंत्रालय आयुर्वेद और आयुष के महत्व के विश्व भर में प्रसार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करेगा।

आयुर्वेद के प्रसार के लिए WHO से समझौता करेगा आयुष मंत्रालय, 2015-16 कृषि वृद्धि दर 1.1 फीसदी रहने का अनुमान- India TV Hindi
आयुर्वेद के प्रसार के लिए WHO से समझौता करेगा आयुष मंत्रालय, 2015-16 कृषि वृद्धि दर 1.1 फीसदी रहने का अनुमान

मुंबई। आयुष मंत्रालय आयुर्वेद और आयुष के महत्व के विश्व भर में प्रसार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा, आयुर्वेद और आयुष से जुड़ी सूचनाओं का प्रसार पूरे देश और विश्व में किया जाना चाहिए। इसलिए आयुष मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। उन्होंने कहा, आयुष मंत्रालय का लक्ष्य आयुर्वेद को देश के जिले-जिले तक पहुंचाना है।

नाइक ने आयुर्वेद के क्षेत्र में निरंतर और प्रतिबद्ध सेवा करने वाले वरिष्ठ डॉक्टरों को साण्डू आयुर्वेद गौरव का पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने कहा, हमें भारत में रोगमुक्त करना चाहिए और यह इस दिशा में पहला कदम है। 21 जून को विश्व योग दिवस का आयोजन किया गया था। दूसरे विश्व योग दिवस की तैयारी पिछले दो महीने से चल रही है। नाइक ने कहा कि हम जल्दी ही विश्व आयुर्वेद दिवस मनाएंगे।

नाइक ने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य उज्ज्वल है। इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति के प्रोत्साहन और प्रसार की जरूरत है। उन्होंने कहा, पिछले महीने अमेरिकी डॉक्टरों का एक दल कैंसर पर चर्चा के लिए भारत आया था। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि भारत और अमेरिका अगले दो महीने में कैंसर पर अनुसंधान संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा।

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वास्तविक कृषि वृद्धि दर 2015-16 में 1.1 फीसदी रहेगी: नोमूरा

देश की वास्तविक कृषि सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 2015-16 में बढ़कर 1.1 फीसदी रहने का अनुमान है। नोमूरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल सामान्य से कम मानसून के बावजूद कृषि वृद्धि दर बढ़ेगी। जापान की वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में मौजूदा विविधीकरण से कृषि उत्पादन और कृषि आय में उतार-चढ़ाव घटा है। इसमें कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में बदलाव आया है। पहले यह मुख्य रूप से खाद्यान्न (गेहूं और चावल) के प्रभुत्व वाला क्षेत्र था। अब इस क्षेत्र में बागवानी तथा पशुपालन आदि का भी महत्व बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्यान्न उत्पादन पर समय के साथ निर्भरता कम होने से कृषि जीडीपी की वृद्धि दर में उतार-चढ़ाव घटा है।

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