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New Limit: सरकार ने नकद लेनदेन की सीमा घटाकर की 2 लाख रुपए, उल्‍लंघन करने पर देना होगा 100% जुर्माना

Abhishek Shrivastava Published : Mar 21, 2017 05:47 pm IST, Updated : Mar 21, 2017 08:37 pm IST

अब अगर आप 2 लाख रुपए से ज्‍यादा का नकद लेनदेन करेंगे तो आपको 100% जुर्माना देना होगा। सरकार ने सीमा 3 लाख से घटाकर 2 लाख रुपए करने का प्रस्‍ताव किया है।

New Limit: सरकार ने नकद लेनदेन की सीमा घटाकर की 2 लाख रुपए, उल्‍लंघन करने पर देना होगा 100% जुर्माना- India TV Paisa
New Limit: सरकार ने नकद लेनदेन की सीमा घटाकर की 2 लाख रुपए, उल्‍लंघन करने पर देना होगा 100% जुर्माना

नई दिल्‍ली। अब अगर आप 2 लाख रुपए से ज्‍यादा का नकद लेनदेन करेंगे तो आपको 100% जुर्माना देना होगा। सरकार ने मंगलवार को नकदी लेनदेन की सीमा 3 लाख से घटाकर 2 लाख रुपए करने का प्रस्‍ताव किया है। इससे पहले वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण 2017 में कालेधन पर रोक लगाने के लिए नकद लेन-देन की सीमा 3 लाख रुपए करने की घोषणा की थी। सरकार अब इस सीमा को घटाकर 2 लाख रुपए करना चाहती है।

सरकार ने इस प्रस्‍ताव में नियम का उल्‍लंघन करने पर 100 प्रतिशत जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया है। राजस्‍व सचिव हसमुख अधिया ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा है कि इस नियम का उल्‍लंघन करने वाले को लेनदेन की रकम के बराबर जुर्माना देना होगा।  मंगलवार को ही वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में फाइनेंस बिल को चर्चा के लिए पेश किया है। इसके पास होने के बाद ही नकदी में लेनदेन का यह नया नियम एक अप्रैल 2017 से प्रभावी हो जाएगा।

उल्‍ले‍खनीय है कि कालेधन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अर्थव्यवस्था में कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए तीन लाख रुपए से अधिक राशि के नकद लेनदेन पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। इसके अलावा व्यक्तिगत स्तर पर 15 लाख रुपए से अधिक नकद राशि रखने पर भी रोक लगाने का सुझाव एसआईटी ने सरकार को दिया है। रिटायर्ड जज एम.बी. शाह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी पांचवी रिपोर्ट सौंपी है जिसमें अर्थव्यवस्था में कालेधन को कम करने के लिए ये सुझाव दिए गए हैं। समिति मानती है कि बिना हिसाब-किताब वाली काफी पूंजी नकदी के रूप में इस्तेमाल होती है और खजानों में रखी गई है।

एसआईटी ने रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति अथवा उद्योग को सीमा से अधिक नकदी रखने की जरूरत होती है तो वह इसके लिये क्षेत्र के आयकर आयुक्त से इसके लिए जरूरी अनुमति ले सकता है।

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