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कोरोना काल में नौकरियों पर पड़ी कितनी मार, पहली बार सच्चाई आई सामने

कोरोना संकट के बीच लोगों को बीते 2020 के साल ने सिर्फ लोगों से अपनों की जिंदगियां छीनीं वहीं नौकरियों के मामले में भी बीता साल काल बनकर आया।

IndiaTV Hindi Desk Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published on: March 16, 2021 15:45 IST
कोरोना काल में...- India TV Hindi News

कोरोना काल में नौकरियों पर पड़ी कितनी मार, पहली बार सच्चाई आई सामने

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच लोगों को बीते 2020 के साल ने सिर्फ लोगों से अपनों की जिंदगियां छीनीं वहीं नौकरियों के मामले में भी बीता साल काल बनकर आया। हर ओर से लोगों की नौकरिया छूटने की खबरें आईं। वहीं अब सरकार की ओर से एक पुष्टि भी आई है। ईपीएफओ के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वेतनभोगी कर्मचारियों पर कोरोना से मिली आर्थिक चुनौतियों का काफी असर पड़ा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2020-21 के आरंभिक नौ महीने यानी अप्रैल से दिसंबर के दौरान 71,01,929 भविष्य निधि के खाते बंद किए गए। यह एक साल पहले की समान अवधि के दौरान बंद किए गए खातों की संख्या 66,66,563 से 6.5 फीसदी अधिक है। 

श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में दी है। लोकसभा सदस्य अब्दुल खालेक के सवाल का जवाब देते हुए श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री ने सदन को बताया कि 2020 के अप्रैल से लेकर दिसंबर तक ईपीएफ के 71,01,929 खाते बंद किए गए।उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि 2020 अप्रैल से दिसंबर के दौरान ईपीएफ खातों से 73,498 करोड़ रुपये की निकासी की गई जबकि 2019 की इसी अवधि के दौरान 55,125 करोड़ रुपये की निकासी की गई थी। 

बीते वित्त वर्ष के आरंभिक नौ महीने के आंकड़ों से जाहिर है कि पिछले साल अक्टूबर महीने में सबसे ज्यादा 11,18,751 खाते बंद किए गए जबकि इससे पहले सितंबर महीने में 11,18,517 खाते बंद किए गए। मालूम हो कि कोरोना महामारी के मद्देनजर पिछले साल केंद्र सरकार ने इपीएफ खाते से तीन महीने के वेतन की निकासी की अनुमति दी थी जिसपर सर्विस चार्ज की छूट दी गई थी।

एक अन्य सदस्य राकेश सिंह के सवालों का जवाब देते हुए गंगवार ने कहा कि ईपीएफ में निवेश में पिछले तीन साल से बढ़ोतरी की प्रवृति देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में ईपीएफ में 1,68,661.07 करोड़ रुपये का निवेश हुआ जबकि इससे पूर्व 2018-19 में 1,41,346.85 करोड़ रुपये और 2017-18 में 1,26,119.92 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।

क्यों बंद होते हैं पीएफ खाते 

जानकार बताते हैं कि कर्मचारियों के पीएफ खाते कई कारणों से बंद होते हैं। मसलन, नौकरियां छूट जाने से बेकारी का शिकार होना, सेवानिवृत्त होना और कभी-कभार नौकरियां बदलने पर भी लोग पीएफ अकाउंट बंद कर देते हैं।

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