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पवनहंस के लिये बोली लगाने की समयसीमा एक माह बढ़ाकर 18 फरवरी की गई

पवन हंस लिमिटेड में सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि शेष 49 प्रतिशत आयल एण्ड नेचुरल गैस कार्पोरेशन (ओएनजीसी) के पास है। ओएनजीसी ने सरकार के साथ अपनी पूरी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचने का फैसला किया है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Jan 18, 2021 09:24 pm IST, Updated : Jan 18, 2021 09:24 pm IST
बोली के लिए समयसीमा...- India TV Paisa
Photo:PAWAN HANS

बोली के लिए समयसीमा बढ़ी

नई दिल्ली। सरकार ने पवन हंस के अधिग्रहण के लिये शुरुआती बोली सौंपने की समयसीमा को एक माह बढ़ाकर 18 फरवरी कर दिया है। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एक नोटिस जारी कर कहा है कि मौजूदा कोविड- 19 की स्थिति और बोली में भाग लेने के इच्छुक निवेशकों के समक्ष आने वाली आवागमन की चुनौती को देखते हुये समय सीमा को अब बढ़ाकर 18 फरवरी 2021 कर दिया गया है। दीपम ने पिछले साल दिसंबर में हेलिकाप्टर सेवायें देने वाली कंपनी पवन हंस के प्रबंधन नियंत्रण को हस्तांतरित करने सहित उसकी रणनीतिक बिक्री के लिये बोलियां आमंत्रित की थी। इसके लिये बोली लगाने की अंतिम तिथि 19 जनवरी रखी गई थी।

पवन हंस लिमिटेड में सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि शेष 49 प्रतिशत आयल एण्ड नेचुरल गैस कार्पोरेशन (ओएनजीसी) के पास है। ओएनजीसी ने सरकार के साथ अपनी पूरी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचने का फैसला किया है। पवन हंस 1985 में गठित की गई थी। उसे ओएनजीसी की तेल खोज गतिविधियों के काम में हेलिकाप्टर सेवायें देने के लिये एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के तौर पर बनाया गया। पवन हंस की 31 जुलाई 2020 की स्थिति के मुताबिक उसमें 686 कर्मचारी हैं। इनमें 363 नियमित कमैचारी हैं जबकि 323 अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी है। वित्त वर्ष 2019- 20 में कंपनी ने 28 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। साल 2018 में सरकार ने 51 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोलियां मांगी थीं। हालांकि बाद में ओएनजीसी के द्वारा सरकार के साथ ही अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला करने पर बिड का वापस ले लिया गया। जिसके बाद 2019 में बोलियां मंगाई गई जिसमें उम्मीदों के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला। सरकार ने इस साल सरकारी कंपनियों में छोटी हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए अब तक 15200 करोड़ रुपये जुटाए हैं।   

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