Friday, February 06, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. मूडीज ने कहा : सिर्फ सरकारी बैंकों के विलय से नहीं सुधरेगी स्थिति, सरकार को डालनी होगी अतिरिक्‍त पूंजी

मूडीज ने कहा : सिर्फ सरकारी बैंकों के विलय से नहीं सुधरेगी स्थिति, सरकार को डालनी होगी अतिरिक्‍त पूंजी

मूडीज ने कहा है कि हालांकि सरकार की तरफ से नई पूंजी डाले बगैर विलय मात्र से ही सार्वजनिक क्षेत्र के इन बैंकों की पूंजी की कमजोर स्थिति में सुधार नहीं होगा।

Manish Mishra
Published : Aug 28, 2017 03:24 pm IST, Updated : Aug 28, 2017 03:24 pm IST
मूडीज ने कहा : सिर्फ सरकारी बैंकों के विलय से नहीं सुधरेगी स्थिति, सरकार को डालनी होगी अतिरिक्‍त पूंजी- India TV Paisa
मूडीज ने कहा : सिर्फ सरकारी बैंकों के विलय से नहीं सुधरेगी स्थिति, सरकार को डालनी होगी अतिरिक्‍त पूंजी

नई दिल्ली वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज का कहना है कि सरकार की तरफ से बैंकों में अतिरिक्त पूंजी डाले बिना केंद्रीय मंत्रिमंडल के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विलय प्रक्रिया को तेज करने के फैसले मात्र से इन बैंकों की कमजोर पूंजी आधार की स्थिति में सुधार आना मुश्किल है। मूडीज इन्‍वेस्टर्स सर्विस ने आज कहा कि देश के 21 बैंकों के विलय आदि मामलों पर विचार करने और उसकी निगरानी करने के लिए वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में मंत्रियों का समूह गठित करने का फैसला सकारात्मक कदम है, क्योंकि बैंकों के बीच विलय से उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और उनमें संचालन की गुणवत्‍ता में सुधार आएगा।

यह भी पढ़ें :भारत में आज से शुरू हो रहा है विश्‍व का पहला डायमंड फ्यूचर्स एक्‍सचेंज, बड़ी कंपनियों को होगा ये फायदा

मूडीज ने कहा है कि हालांकि सरकार की तरफ से नई पूंजी डाले बगैर विलय मात्र से ही सार्वजनिक क्षेत्र के इन बैंकों की पूंजी की कमजोर स्थिति में सुधार नहीं होगा। सरकार की देश के 21 बैंकों में बहुलांश हिस्सेदारी है, बैंकों की स्थिति में सुधार के लिए इनमें से कुछ के विलय पर विचार किया जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के ये सभी बैंक देश में कुल बैंक संपत्ति में दो-तिहाई का योगदान रखते हैं।

यह भी पढ़ें : आपने भी की है JioPhone की बुकिंग, फोन को ट्रैक करने के लिए ये हैं दो आसान तरीके

मूडीज का कहना है कि सार्वजिनक क्षेत्र के बैंकों में कॉरपोरेट संचालन कमजोर रहना इन बैंकों की बड़ी कमजोरी रही है। सभी 21 बैंकों को व्यवस्थित रखना सरकार के लिए मुश्किल काम रहा है। सरकार इन बैंकों के मामले में दीर्घकालिक रणनीति और मानव संसाधन जैसे मुद्दों पर पूरा ध्यान देने में नाकाम रही है। बैंकों को मजबूत बनाने और उनके एकीकरण से इनमें से कुछ समस्याओं का समाधान हो सकता है।

Latest Business News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा

Advertisement
Advertisement
Advertisement