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वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की जमीनी हकीकत से कोसों दूर, शक्तिकांत दास ने जताई नाराजगी

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : May 06, 2017 05:16 pm IST,  Updated : May 06, 2017 05:16 pm IST

भारत ने वैश्विक रेटिंग एजेंसियों को आड़े हाथों लिया और कहा कि एजेंसियों को आत्मावलोकन करना चाहिए, क्योंकि उनकी रेटिंग भारत की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।

वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की जमीनी हकीकत से कोसों दूर, शक्तिकांत दास ने जताई नाराजगी- India TV Hindi
वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की जमीनी हकीकत से कोसों दूर, शक्तिकांत दास ने जताई नाराजगी

योकोहामा (जापान)। रेटिंग में सुधार नहीं किए जाने से परेशान भारत ने वैश्विक रेटिंग एजेंसियों को आड़े हाथों लिया और कहा कि एजेंसियों को आत्मावलोकन करना चाहिए, क्योंकि उनकी रेटिंग भारत की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। हाल में शुरू किए गए सुधारों के चलते रेटिंग बेहतर होनी चाहिए।

भारत ने विशेषतौर से एसएडंपी ग्लोबल रेटिंग की रेटिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बढ़ते कर्ज के बावजूद चीन को एए- रेटिंग दी गई, जबकि भारत को सबसे खराब रेटिंग से मात्र एक पायदान ऊपर रखा गया है। मूडीज और फिच ने भी ऐसी ही रेटिंग भारत को दी है, जिसका कारण एशियाई देशों में सबसे बड़ा राजकोषीय घाटा होना बताया गया है और यह देश की संप्रभु रेटिंग को बढ़ने से रोकता है।

दास ने यहां भारतीय मीडिया से कहा कि जहां तक सरकार की बात है, वह देश के भले के लिए जरूरी कदमों को उठाना जारी रखेगी, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे होंगे। सरकार बुनियादी सुधार जारी रखेगी, सार्वजनिक निवेश को बढ़ाएगी और वह सब करेगी जो रोजगार सृजन, वृद्धि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगा।

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