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Alert: यूरोप के पास सिर्फ 6 हफ्ते का जेट फ्यूल है बचा, जल्द ही फ्लाइट होने लगेंगी कैंसिल!

 Published : Apr 16, 2026 04:33 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 04:50 pm IST

यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर रही है। यदि अगले कुछ हफ्तों में ईंधन की खेप नहीं बढ़ाई गई, तो यूरोप के हवाई अड्डों पर उड़ानों का पहिया थम सकता है।

ईंधन की वर्तमान उपलब्धता बेहद कम है।- India TV Hindi
ईंधन की वर्तमान उपलब्धता बेहद कम है। Image Source : PIXABAY

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यूरोप में जेट ईंधन का भंडार बहुत सीमित रह गया है और यह केवल लगभग 6 सप्ताह तक ही चल सकता है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख के अनुसार, यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो निकट भविष्य में उड़ानों के रद्द होने की संभावना भी बढ़ सकती है। समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन आपूर्ति में कमी के कारण एयरलाइंस को संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे यात्रा सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

चेतावनी की अहम बातें

  • सीमित स्टॉक: ईंधन की वर्तमान उपलब्धता बेहद कम है। अगर सप्लाई चेन में तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो एयरलाइंस के पास परिचालन जारी रखने के विकल्प खत्म हो सकते हैं।
  • उड़ानों पर असर: ईंधन की इस किल्लत के कारण निकट भविष्य में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने की संभावना जताई जा रही है।
  • परिचालन संबंधी चुनौतियां: समाचार एजेंसी AP के मुताबिक, ईंधन आपूर्ति में इस बाधा से एयरलाइंस के दैनिक कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट

IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने कहा कि मौजूदा हालात “अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” बन रहे हैं। यह संकट होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये तेल, गैस और अन्य ज़रूरी ऊर्जा आपूर्ति के बाधित होने से पैदा हुआ है। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को बताते हुए कहा कि यह “डायर स्ट्रेट” (गंभीर संकट) बन चुका है, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संकट जितना लंबा चलेगा, दुनिया भर में आर्थिक विकास पर उतना ही नकारात्मक असर पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी।

पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होगी!

बिरोल के मुताबिक, इस संकट का असर पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्से इससे ज्यादा प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि सबसे पहले असर एशियाई देशों पर पड़ेगा, जो मध्य पूर्व से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। इसके बाद इसका असर यूरोप और अमेरिका तक पहुंचेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द नहीं खोला गया, तो यूरोप में शहरों के बीच चलने वाली कई उड़ानों को जेट ईंधन की कमी के कारण रद्द करना पड़ सकता है।

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