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जब अमेरिका टैलेंट रोक रहा, चीन ने विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए बिछाया रेड कार्पेट! K-VISA करेगा लॉन्च

 Published : Sep 23, 2025 01:01 pm IST,  Updated : Sep 23, 2025 01:02 pm IST

अमेरिका ने H-1B वीजा की फीस में $1,00,000 की जोरदार बढ़ोतरी कर दी है, जाहिर है ऐसे में कई प्रोफेशनल अमेरिका से बाहर जा सकते हैं। चीन ने इसी अवसर का फायदा उठाने के लिए एक K-VISA ऑफर करने की तैयारी कर रहा है, ताकि विदेशी टैलेंस चीन आ सकें।

चीन की राजधानी बीजिंग का एक दृश्य।- India TV Hindi
चीन की राजधानी बीजिंग का एक दृश्य। Image Source : FREEPIK

अमेरिका में H-1B वीजा की फीस में $1,00,000 की जोरदार बढ़ोतरी के बीच चीन ने एक बड़ा कदम उठाया है। जहां अमेरिका ने H-1B वीजा को महंगा कर विदेशी टैलेंट को सीमित या रोकने का फैसला किया है, वहीं चीन अगले महीने से विदेशी प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के लिए एक नया K-वीजा लॉन्च करने की तैयारी में है। बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीय होंगे, क्योंकि 71% H-1B वीजा भारतीय पेशेवरों को जारी होते हैं, जबकि चीनी पेशेवरों का हिस्सा सिर्फ 11.7% है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस फैसले पर डायरेक्ट कमेंट करने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि चीन ग्लोबल टैलेंट का स्वागत करता है।

चीन कर रहा K-VISA के लॉन्चिंग की तैयारी

खबर के मुताबिक चीन का नया K-VISA आगामी 1 अक्टूबर से लागू होगा और यह चीन की वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने की 2035 तक की लंबी अवधि की योजना का हिस्सा है। इस नए वर्क परमिट में कुछ खास बातें होंगी जिन्हें आपको जान लेना चाहिए:

सरल प्रक्रिया: K-वीजा के लिए किसी चीनी कंपनी या नियोक्ता से निमंत्रण की जरूरत नहीं होगी। यह प्रक्रिया को काफी सरल बनाता है।

युवा पेशेवरों पर ध्यान: यह वीजा विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवा पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है।
अधिक सुविधा: यह मौजूदा वीजा प्रकारों की तुलना में अधिक बार प्रवेश, लंबी वैधता और चीन में रहने की विस्तारित अवधि की अनुमति देगा।
बहु-उपयोग: K-वीजा धारक वैज्ञानिक, तकनीकी, शैक्षिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ उद्यमिता और व्यापार में भी भाग ले सकेंगे।

अमेरिका की तुलना में चीन का स्वागतभाव

जहां एक ओर अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने अनुसंधान और विकास के खर्चों में कटौती के निर्देश दिए हैं, वहीं चीन इसके बिल्कुल उलट काम कर रहा है। वह अपनी 'प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम' और 'उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक निधि परियोजना' जैसी पहलों के जरिये विदेशी शोधकर्ताओं को आकर्षित कर रहा है। यह साफ है कि अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की होड़ तेज हो गई है। 

जहां अमेरिका अपनी नीतियों को सख्त कर रहा है, वहीं चीन इस मौके का फायदा उठाकर खुद को इनोवेशन और रिसर्च के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों की नीतियां भविष्य में ग्लोबल टैलेंट के प्रवाह को किस तरह प्रभावित करती हैं।

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