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OTP लेकर धोखाधड़ी नहीं कर पाएंगे साइबर फ्रॉड, आया 'इन-ऐप मोबाइल ओटीपी' फीचर, जानें कैसे करेगा काम

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Apr 08, 2025 01:11 pm IST,  Updated : Apr 09, 2025 09:02 am IST

डिजिटल बैंकिंग में साइबर खतरों के बढ़ते मामलों, खासकर सिम स्वैप और फिशिंग अटैक को ध्यान में रखते हुए, इन-ऐप मोबाइल ओटीपी एक डिवाइस-बाउंड और Time-sensitive विकल्प प्रदान करता है।

'In-app Mobile OTP' feature- India TV Hindi
'इन-ऐप मोबाइल ओटीपी' फीचर Image Source : FILE

OTP (वन-टाइम पासवर्ड) के जरिये बैंकिंग फ्रॉड के हजारों मामले आपने सुने होंगे। किसी ने कॉल कर ओटीपी ले लिया और बैंक अकाउंट खाली कर दिया। बैंक और RBI लगातार लोगों को ओटीपी किसी से भी साझा नहीं करने की सलाह देते रहते हैं। अब इस खतरे को भांपते हुए एक्सिस बैंक ने बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने 'इन-ऐप मोबाइल ओटीपी' पेश किया है। इसके आने के बाद ओटीपी से धोखाधाड़ी का चांस ही खत्म हो जाएगा। आइए जानते हैं कि कैसे यह काम करेगा। 

SMS के जरिये OTP भेजने की जरूरत नहीं होगी 

एक्सिस बैंक द्वारा शुरू की गई 'इन-ऐप मोबाइल ओटीपी' फीचर में SMS के जरिये ओटीपी भेजने की जरूरत नहीं होगी। यह फीचर एसएमएस के जरिये ओटीपी भेजने की बजाय ऐप के भीतर ही टाइम-बेस्ड वन-टाइम पासवर्ड (TOTP) जनरेट करेगी, जिससे टेलिकॉम नेटवर्क पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। यानी अगर कोई फ्रॉड किसी तरह से ओटीपी ले भी लेगा तो वह धोखाधड़ी नहीं कर पाएगा। साथ ही यह फीचर Faster authentication और धोखाधड़ी के जोखिम को काफी हद तक कम होगा। समीर शेट्टी, प्रेसिडेंट एवं हेड – डिजिटल बिजनेस एंड ट्रांसफॉर्मेशन, एक्सिस बैंक ने कहा: "एक्सिस बैंक में हम धोखाधड़ी की घटनाओं को कम करने और ग्राहक सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं।

सिम स्वैप और फिशिंग अटैक के मामले बढ़ें

डिजिटल बैंकिंग में साइबर खतरों के बढ़ते मामलों, खासकर सिम स्वैप और फिशिंग अटैक को ध्यान में रखते हुए, इन-ऐप मोबाइल ओटीपी एक डिवाइस-बाउंड और Time-sensitive विकल्प प्रदान करता है, जो धोखाधड़ी की आशंका को कम करेगा। ग्राहक इसका उपयोग इंटरनेट बैंकिंग में लॉग इन करने और लेनदेन के प्रमाणीकरण के लिए भी कर सकते हैं। यह सेवा ग्लोबल स्तर पर उपलब्ध है और इंटरनेट के माध्यम से काम करती है, जिससे विदेश यात्रा के दौरान भी authentication में कोई बाधा नहीं आती। इसके अलावा, ग्राहक को लॉगिन और लेनदेन के प्रयासों की रीयल-टाइम सूचनाएं मिलती हैं, जिससे खातों पर बेहतर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

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