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दिल्ली-NCR में ऑफिस स्पेस की मांग में आया जबरदस्त उछाल, 3 महीने में 2.5 गुना बढ़ी कॉर्पोरेट लीजिंग

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Oct 02, 2025 07:08 pm IST,  Updated : Oct 02, 2025 07:08 pm IST

दिल्ली-एनसीआर का ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट इस समय तेजी की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जुलाई से सितंबर 2025 की तिमाही में कॉर्पोरेट्स की बढ़ती मांग के चलते नेट लीजिंग 2.5 गुना बढ़कर 37.9 लाख वर्ग फीट पहुंच गई।

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दिल्ली-एनसीआर ऑफिस मार्केट में तेजी। Image Source : CANVA

दिल्ली-एनसीआर की रियल एस्टेट मार्केट में ऑफिस स्पेस की मांग ने रिकॉर्ड उछाल लगाया है। कुस्मैन एंड वेकफील्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में नेट ऑफिस लीजिंग 2.5 गुना बढ़कर 37.9 लाख वर्ग फुट हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में 15.2 लाख वर्ग फुट थी। एक्सपर्ट का कहना है कि इस उछाल का मुख्य कारण कॉर्पोरेट्स की बढ़ती जरूरत और प्रीमियम वर्कस्पेस की ओर ट्रेंड है।

इस दौरान दिल्ली-एनसीआर ने टॉप आठ शहरों में ऑफिस स्पेस की कुल नेट लीजिंग में 23 प्रतिशत का योगदान दिया। वहीं, आठ प्रमुख शहरों में कुल नेट लीजिंग इस तिमाही में 16.25 मिलियन (162.5 लाख) वर्ग फुट तक पहुंच गई, जो पिछले साल इसी समय 12.08 मिलियन (120.8 लाख) वर्ग फुट थी। पहले नौ महीनों में कुल नेट एब्जॉर्प्शन 44.3 मिलियन (443 लाख) वर्ग फुट दर्ज की गई, जो कि पिछले साल की पूरी सालाना संख्या 50.7 मिलियन (507 लाख) वर्ग फुट का लगभग 87 प्रतिशत है।

टूटेगा पिछले साल का रिकॉर्ड

कुस्मैन एंड वेकफील्ड के अनुसार, साल का अंतिम क्वार्टर अभी बाकी है और एक्टिव डील्स की मजबूत पाइपलाइन के चलते इस साल पिछले साल का रिकॉर्ड टूटने की पूरी संभावना है। SEA & APAC ऑफिस और रिटेल प्रमुख (इंडिया) अंशुल जैन ने बताया कि भारत का ऑफिस सेक्टर अब विस्तार के दौर में है। इस तिमाही की 80 प्रतिशत लीजिंग नई है, यानी कंपनियां केवल रिन्यू नहीं कर रही बल्कि अपनी ऑफिस स्पेस बढ़ा रही हैं।

हाई क्वालिटी ऑफिस स्पेस

एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि इस तिमाही में लगभग 80 प्रतिशत नया ऑफिस स्पेस ग्रेड-A+ प्रीमियम वर्कस्पेस में था, जो बताता है कि कंपनियां भविष्य के लिए तैयार और हाई क्वालिटी वाले ऑफिस चुन रही हैं। अंशुल जैन ने कहा कि इस बदलाव को लंबे समय तक चलने वाले फैक्टर्स ने प्रेरित किया है, जैसे कि ग्लोबल कैपिटल सेंटर्स (GCCs) का बढ़ना, स्टार्ट-अप्स का विस्तार और मैन्युफैक्चरिंग व इंजीनियरिंग सेक्टर की पुनरुत्थान।

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