मार्च तिमाही में दैनिक उपभोग की वस्तुएं (FMCG) बनाने वाली कंपनियों के लिए ग्रामीण बाजारों में शहरी बाजारों की तुलना में बेहतर ग्रोथ दर्ज हुई। हालांकि, इस अवधि में कमोडिटी की ऊंची कीमतों के कारण एफएमसीजी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रहा। प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों डाबर, मैरिको और एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस (पूर्व में अडानी विल्मर) के तिमाही आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी-मार्च 2025 में पारंपरिक किराना दुकानें दबाव में रहीं। जबकि ई-कॉमर्स और त्वरित वाणिज्य (क्विक कॉमर्स) जैसे आधुनिक माध्यमों ने अपनी ग्रोथ की गति बनाए रखी। शहरी बाजारों में खाद्य महंगाई का डिमांड पर असर जारी रहा।
शहरी बाजार का योगदान लगभग दो-तिहाई
कुल एफएमसीजी बिक्री में शहरी बाजार का योगदान लगभग दो-तिहाई है। इसके बावजूद, एफएमसीजी कंपनियां रिटेल और फूड इन्फ्लेशन में कमी व सामान्य मानसून के अनुमान के चलते चालू वित्त वर्ष में प्रॉफिटेबल ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं। डाबर इंडिया ने अपनी चौथी तिमाही के ब्योरे में कहा कि ग्रामीण इलाकों में मांग मजबूती बनी रही और उन्होंने शहरी बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि तिमाही के दौरान एफएमसीजी बिक्री मात्रा के हिसाब से धीमी रही।
डाबर के रेवेन्यू में गिरावट का अनुमान
एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस ने विशेष रूप से फूड कैटेगरी में शहरी बाजारों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर ग्रोथ दर्ज करने की बात कही। मैरिको ने बताया कि पिछली तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर में 'ग्रामीण बाजार में सुधार' के साथ स्टेबल डिमांड का रुझान देखा गया, जबकि बड़े पैमाने पर और प्रीमियम शहरी क्षेत्रों में रुझान मिला-जुला रहा। डाबर को पिछली तिमाही में अपने राजस्व में गिरावट और मुद्रास्फीति के कारण परिचालन लाभ मार्जिन में 1.5-1.75 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। कंपनी ने सर्दियों की अवधि कम रहने को भी इसका एक कारण बताया। क्विक-कॉमर्स मीडियम की ग्रोथ पर एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस ने कहा कि इस लोकलाइज्ड सप्लाई सिस्टम से उसकी बिक्री मार्च तिमाही में सालाना आधार पर दोगुनी हो गई। डाबर ने कहा कि संगठित व्यापार माध्यम ने अपनी ग्रोथ की गति बनाए रखी, जबकि सामान्य व्यापार दबाव में रहा।