सरकार दिल्ली में 55 किलोमीटर लंबे इनर रिंग रोड पर एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है। इससे दिल्ली के सबसे व्यस्त यातायात गलियारों में से एक पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, गाड़ियों की बढ़ती तादाद को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार किया जा रहा है। यह एलिवेटेड कॉरिडोर फिलहाल शुरुआती फेज में है। जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को एक सलाहकार नियुक्त करने और एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया है।
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कितनी आएगी लागत?
खबर के मुताबिक, इस एलिवेटेड कॉरिडोर को बनाने की लागत 5,500 करोड़ से 6,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है, जो शहरी भारत में एलिवेटेड बुनियादी ढांचे के लिए हाल के स्टैंडर्ड के मुताबिक, लगभग 100 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस डेवलपमेंट को कन्फर्म करते हुए कहा कि हमने अधिकारियों को एक सलाहकार की नियुक्ति में तेजी लाने का निर्देश दिया है। डीपीआर तकनीकी व्यवहार्यता और यातायात डायवर्जन मॉडल, की जांच करेगा, ताकि निर्माण के दौरान न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित हो।
टोल देने को तैयार यूजर्स को होगी सुविधा
इस एलिवेटेड रोड को एक प्रीमियम कॉरिडोर के तौर पर आंका जा रहा है, जो मौजूदा इनर रिंग रोड से ऊपर उठेगा और टोल देने को तैयार यूजर्स को सिग्नल-फ्री, हाई स्पीड की पहुंच प्रदान करेगा। इनर रिंग रोड को असम में सेंट्रल दिल्ली से ट्रैफिक को हटाने के लिए एक पेरिफेरल बाईपास के रूप में बनाया गया था। तब राजधानी में 30 लाख से भी कम निवासी थे। आज यहां 3 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। अकेले दिल्ली में गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 1.4 करोड़ को पार कर गया है।
दिल्ली सरकार का मानना है कि यह एलिवेटेड कॉरिडोर पैसेंजर्स को बड़ी राहत देगा। यह शहर के सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाने और ट्रैफिक जाम से होने वाले समय की बर्बादी को कम करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।