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भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट से एक्सपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार, जानें वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में क्या है खास

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 27, 2025 10:25 pm IST,  Updated : May 27, 2025 10:25 pm IST

वित्त मंत्रालय की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में कहा गया है कि विदेशी निवेशक उन नीतियों पर पॉजिटिव रिएक्शन दे सकते हैं जो देश की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को मजबूत करती हैं।

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ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार और मजबूत सेवा निर्यात से मजबूत हो रही है इकोनॉमी Image Source : AP

अमेरिका-भारत के बीच सफल बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट मौजूदा हालातों को काफी शानदार बना सकता है। इससे नए बाजारों तक पहुंच खुल सकती है और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल सकता है। वित्त मंत्रालय की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में ये कहा गया है। भारत और अमेरिका 8 जुलाई से पहले अंतरिम व्यापार समझौते को निष्कर्ष पर पहुंचा सकते हैं। इसमें भारत घरेलू वस्तुओं पर 26 प्रतिशत टैरिफ से पूरी छूट देने पर जोर दे रहा है। अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय वस्तुओं पर अलग से 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाया था, लेकिन इसे 90 दिन के लिए 9 जुलाई तक के लिए निलंबित कर दिया था। हालांकि, 10 प्रतिशत बेसिक टैरिफ को लागू रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत में इंवेस्टमेंट के लिए आकर्षक गंतव्यों में से एक बने रहने की क्षमता है। 

सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है भारत

वित्त मंत्रालय की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में कहा गया है कि विदेशी निवेशक उन नीतियों पर पॉजिटिव रिएक्शन दे सकते हैं जो देश की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को मजबूत करती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि खासतौर से, देश के युवा कार्यबल के कौशल और उत्पादकता को बढ़ाने वाली नीतियां निवेश और वृद्धि के चक्र को काफी मजबूत कर सकती हैं। इसके अनुसार, भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जहां अलग-अलग ग्लोबल एजेंसियों ने अन्य देशों के ग्रोथ रेट में महत्वपूर्ण कटौती की है, वहीं भारत के मामले में ये सबसे कम है। 

2025-26 के लिए भारत का जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के विश्व आर्थिक परिदृश्य (अप्रैल 2025) के अनुसार, 2025-26 के लिए भारत का वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो जनवरी, 2025 में इसके पिछले पूर्वानुमान से 0.30 प्रतिशत कम है। ये बदलाव वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापार तनाव को देखते हुए किए गए हैं। कई एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के ग्रोथ 6.3 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जिसे मजबूत घरेलू बुनियाद, स्थिर वृहद आर्थिक प्रबंधन और बढ़ते सरकारी पूंजीगत व्यय से समर्थन मिल रहा है। वहीं घटती महंगाई इस परिदृश्य को और मजबूत करती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत घरेलू बुनियाद, सूझबूझ वाला वृहद आर्थिक प्रबंधन और बाहरी झटकों को झेलने की क्षमता इसकी विशेषता बनी हुई है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार और मजबूत सेवा निर्यात से मजबूत हो रही है इकोनॉमी

मजबूत निजी खपत, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार और मजबूत सेवा निर्यात विकास के प्राथमिक इंजन बने हुए हैं। इसमें कहा गया, ‘‘सर्विस सेक्टर में लगातार स्वस्थ विस्तार हो रहा है। इससे वस्तु निर्यात में कुछ नरमी की भरपाई हो रही है। भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है और विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर रहा है।’’ रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति के मामले में दृष्टिकोण आशावादी बना हुआ है। आने वाले समय में रबी की अच्छी फसल, ग्रीष्मकालीन फसलों के तहत रकबे में वृद्धि और खाद्यान्नों के बेहतर बफर स्टॉक के कारण खाद्य मुद्रास्फीति दबाव कम रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग का सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट महंगाई में कमी के रुख को मजबूत करती है।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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