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Strait of Hormuz में बिछा माइंस का जाल! ईरान ने जहाजों के लिए जारी किए नए सीक्रेट रूट, दुनिया हैरान

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 09, 2026 03:00 pm IST,  Updated : Apr 09, 2026 03:00 pm IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर चर्चा में है। ईरान ने यहां समुद्री माइंस के खतरे को देखते हुए जहाजों के लिए नए वैकल्पिक रास्ते जारी किए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के...- India TV Hindi
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नए वैकल्पिक रास्ते Image Source : CANVA

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने समुद्र में माइन्स के खतरे को देखते हुए जहाजों के लिए नए वैकल्पिक रास्ते जारी किए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।

मुख्य रास्ता खतरनाक, नए रूट अपनाने की सलाह

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुख्य शिपिंग लेन में माइन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में जहाजों को टकराव और दुर्घटना से बचाने के लिए नए रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। यह फैसला वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि किसी भी हादसे से तेल सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है।

क्या हैं ये नए ‘सीक्रेट रूट’?

ईरान ने जहाजों के लिए एंट्री और एग्जिट के दो नए रास्ते तय किए हैं:

  • इनबाउंड रूट (आने वाले जहाजों के लिए): गल्प ऑफ ओमान से उत्तर दिशा में लारक द्वीप की ओर बढ़ते हुए जहाज पर्शियन गल्फ में प्रवेश करेंगे।
  • आउटबाउंड रूट (जाने वाले जहाजों के लिए): पर्शियन गल्फ से निकलते समय जहाज लारक द्वीप के दक्षिण से गुजरते हुए गल्फ ऑफ ओमान की ओर जाएंगे।

क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। यह पर्शियन गल्फ को गल्फ ऑफ ओमान से जोड़ता है और इसकी चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर करीब 33 किलोमीटर है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर और ईरान जैसे देशों का तेल इसी मार्ग से एशियाई देशों, खासकर चीन, तक पहुंचता है। अगर यहां कोई भी रुकावट आती है तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर पड़ता है।

सीजफायर के बावजूद क्यों बना हुआ है खतरा?

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि समुद्र में बिछी माइंस अभी भी हटाई नहीं गई हैं, जिससे मुख्य रास्ता असुरक्षित बना हुआ है। इस वजह से शिपिंग कंपनियां और देश लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ कहा है कि जब तक ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तब तक अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में तैनात रहेगी।उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। इस बयान ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा दिया है।

तेल बाजार में हलचल, कीमतों में उछाल

इस पूरे घटनाक्रम का असर सीधे तेल बाजार पर दिख रहा है। निवेशकों को डर है कि अगर सप्लाई बाधित हुई तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 96-97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो संघर्ष शुरू होने से पहले लगभग 70 डॉलर के आसपास थी। हालांकि सीजफायर की खबर के बाद थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन अनिश्चितता के चलते कीमतें फिर चढ़ने लगी हैं।

दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है। भारत जैसे देशों के लिए यह और भी अहम है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात किया जाता है।

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