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इजरायल-ईरान जंग से रुपये की विनिमय दर और महंगाई पर पड़ेगा असर, वित्त मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 07, 2026 10:31 am IST,  Updated : Mar 07, 2026 10:31 am IST

ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है और एलएनजी की कीमतें भी लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।

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80 डॉलर के करीब पहुंची ब्रेंट क्रूड की कीमत Image Source : AP

वित्त मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही पेट्रोलियम और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय की फरवरी की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट कहती है कि सुरक्षित निवेश की ओर पूंजी का प्रवाह होने से मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद बढ़े तनाव के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है। ये रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है।

80 डॉलर के करीब पहुंची ब्रेंट क्रूड की कीमत

इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है और एलएनजी की कीमतें भी लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक होने के बावजूद पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, कम चालू खाते का घाटा और नियंत्रित मुद्रास्फीति के कारण बढ़ती वैश्विक कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने में सक्षम है। हालांकि, ये संकट लंबा खिंचने की स्थिति में विनिमय दर, चालू खाते का घाटा और मुद्रास्फीति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। एलएनजी और कच्चे तेल पर निर्भर उर्वरक एवं पेट्रोरसायन जैसे क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। 

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत

रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है, जिसमें वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत और वास्तविक सकल मूल्यवर्धन वृद्धि 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जनवरी, 2026 में आर्थिक गतिविधियां व्यापक आधार पर मजबूत रहीं, जिन्हें लॉजिस्टिक गतिविधि, पीएमआई में विस्तार और मजबूत मांग जैसे उच्च आवृत्ति संकेतकों का समर्थन मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद बाहरी क्षेत्र स्थिर बना हुआ है। साथ ही, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों समेत सक्रिय व्यापार कूटनीति से निर्यात गंतव्यों का विविधीकरण और मध्यम अवधि में बाह्य मजबूती बढ़ने की उम्मीद है। 

भाषा इनपुट्स के साथ

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