उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जल्द ही प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के बीच सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकता है। सरकार लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी कर रही है, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसके बन जाने के बाद पूर्वांचल से दिल्ली तक हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार हो जाएगा और यात्रियों को लंबे ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
50 किलोमीटर का बनेगा नया लिंक एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे करीब 50.94 किलोमीटर लंबा होगा। यह एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना है, यानी इसे पूरी तरह नई जमीन पर आधुनिक तकनीक के साथ बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने टेंडर भी जारी कर दिया है।इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 2,864.82 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य है कि इस परियोजना को 36 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाए।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से मिलेगा सीधा कनेक्शन
वर्ष 2021 में शुरू हुआ 341 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे गाजीपुर को लखनऊ के पास चांद सराय गांव से जोड़ता है। इसके जरिए गाजीपुर से लखनऊ का सफर लगभग साढ़े तीन घंटे में पूरा किया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे से लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर जैसे जिलों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिली है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से बनेगा हाई-स्पीड नेटवर्क
302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पहले से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजधानी को जोड़ता है। यह एक्सप्रेसवे आगरा से लखनऊ के बीच यात्रा का समय काफी कम कर चुका है। अब जब लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे बन जाएगा, तो यह आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा। इससे पूर्वांचल से दिल्ली-एनसीआर तक बिना शहर के ट्रैफिक में फंसे हाई-स्पीड यात्रा संभव हो सकेगी।
लखनऊ के ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल जाने वाले वाहनों को लखनऊ के आसपास भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। लेकिन नए लिंक एक्सप्रेसवे के बनने के बाद लंबी दूरी के वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर से गुजर सकेंगे। इससे न केवल राजधानी के अंदर का ट्रैफिक कम होगा, बल्कि भारी वाहनों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी आ सकती है।



































