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भारत की US-EU और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल ने दिया अपडेट, जानें क्या कहा

 Published : Nov 14, 2025 05:28 pm IST,  Updated : Nov 14, 2025 05:36 pm IST

भारत पहले ही यूएई, ऑस्ट्रेलिया और चार देशों के यूरोपीय EFTA समूह के साथ FTA लागू कर चुका है। उम्मीद है इन देशों के साथ भी जल्द सहमति बनेगी।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल।- India TV Hindi
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल। Image Source : GRABBED IMAGE FROM X HANDLE @PIYUSHGOYAL

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि भारत इस समय अमेरिका, यूरोपीय संघ यानी EU, न्यूजीलैंड, ओमान, पेरू और चिली सहित कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि कई अन्य देशों ने भी भारत के साथ औपचारिक वार्ता शुरू करने की इच्छा जताई है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सीआईआई पार्टनरशिप समिट 2025 में संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाओं को कम करना वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी के मुक्त प्रवाह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत पहले ही यूएई, ऑस्ट्रेलिया और चार देशों के यूरोपीय EFTA समूह के साथ एफटीए लागू कर चुका है।

आंध्र प्रदेश में बनेगा ‘भारत मंडपम’ जैसा कन्वेंशन सेंटर

मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की कि इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) आंध्र प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी कर आंध्र मंडपम को नई दिल्ली के भारत मंडपम की तरह एक विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए तैयार है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराएगी। 

ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में बड़े सुधार

गोयल ने बताया कि केंद्र सरकार ने कारोबार को सुगम बनाने के लिए अब तक 42,000 से अधिक अनावश्यक कंप्लायंस समाप्त किए हैं, और 1,500 पुराने, अप्रासंगिक कानूनों को पूरी तरह खत्म किया है। उन्होंने कहा कि ये कदम भारत को वैश्विक व्यापार भागीदारी और निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाते हैं। मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें:

दोतरफा निवेश को बढ़ावा देना

  • व्यापार बाधाओं में कमी
  • पारदर्शी और खुला कारोबारी वातावरण बनाना
  • वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी का मुक्त प्रवाह सुनिश्चित करना
  • तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन देना
  • दीर्घकालिक भागीदारी के लिए स्थिर और पूर्वानुमेय नीति ढांचा तैयार करना 

गोयल ने कहा कि जब दुनिया भर में संरक्षणवादी नीतियां बढ़ रही हैं, ऐसे समय में पारस्परिक सहयोग और खुला व्यापार ढांचा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

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