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अमेरिका-चीन में ट्रेड डील पर नहीं बन रही बात, जिनेवा से निकलकर आई ये खबर

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : May 11, 2025 09:47 pm IST,  Updated : May 11, 2025 09:47 pm IST

बातचीत का उद्देश्य अमेरिका और चीन, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार विवाद को कम करना है।

US China - India TV Hindi
अमेरिका-चीन Image Source : FILE

अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील को लेकर जिनेवा में चल रही वार्ता में बात बनती नहीं दिख रही है। रविवार को दोनों देशों ने शुल्क संबंधी मुद्दों पर बातचीत दोबारा शुरू की, लेकिन चर्चा की मौजूदा स्थिति को लेकर दोनों पक्षों की राय में स्पष्ट अंतर नजर आ रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हो रही है। हालांकि, चीन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बीजिंग की सरकारी समाचार एजेंसी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि चीन किसी भी ऐसे प्रस्ताव को दृढ़ता से खारिज करेगा, जो उसके मूल सिद्धांतों से समझौता करता हो या वैश्विक समानता के व्यापक लक्ष्य को कमजोर करता हो। जिनेवा में यह बातचीत सोमवार को अपने दूसरे और अंतिम दिन में प्रवेश कर गई है।

ट्रंप ने कोई विवरण नहीं दिया 

इसके बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि वार्ता में “बड़ी प्रगति” हो रही है, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई अतिरिक्त विवरण साझा नहीं किया। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी बातचीत को लेकर सीमित जानकारी दी है। पूरी वार्ता प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है, और शनिवार को जब दोनों पक्ष बातचीत के बाद लौटे, तो उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।

इस बातचीत का उद्देश्य अमेरिका और चीन—दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार विवाद को कम करना है, जिसने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता को बढ़ाया है। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर कर रहे हैं, जबकि चीन की ओर से वार्ता का नेतृत्व वाइस प्रीमियर ही लाइफेंग कर रहे हैं।

नतीजा सामने आने की उम्मीद कम 

हालांकि इस वार्ता से किसी बड़े समझौते की तत्काल उम्मीद नहीं की जा रही है, लेकिन यह अनुमान जरूर लगाया जा रहा है कि दोनों देश कुछ प्रमुख वस्तुओं पर भारी-भरकम शुल्क में कटौती कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों को राहत मिलेगी और उन कंपनियों को भी फायदा होगा, जिनका व्यापार अमेरिका और चीन पर निर्भर है।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयात पर उच्च शुल्क लगाने के फैसले के बाद चीन ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अप्रैल में ट्रंप द्वारा शुल्क बढ़ाने के बाद चीन ने भी अमेरिकी सामान पर शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। फिलहाल, चीन से आने वाले कुछ उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाया गया शुल्क 145 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर चीन ने 125 प्रतिशत तक शुल्क लगा रखा है।

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