होम लोन या कोई दूसरा लोन लेते समय आपने 'फ्लैट ब्याज दर' और 'रिड्यूसिंग रेट' जैसे शब्द सुने होंगे। होम लोन का रीपेमेंट आप समान मासिक किस्तों (EMI) में करते हैं, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। ब्याज की गणना इन्हीं दो तरीकों में से किसी एक से की जाती है। यह जानना जरूरी है कि आपका बैंक आपसे किस रेट पर ब्याज वसूल रहा है, ताकि आप सही फैसला ले सकें। आइए इन दोनों को समझते हैं।
फ्लैट रेट क्या होती है?
फ्लैट ब्याज दर का मतलब है कि आपके लोन पर लगने वाला ब्याज पूरी लोन अवधि के लिए पूरी मूल लोन राशि पर ही गिना जाएगा। इसमें ब्याज दर पूरी अवधि के दौरान एक जैसी रहती है और आपको हर महीने एक निश्चित EMI चुकानी होती है। फ्लैट रेट की गणना एक साधारण फॉर्मूले से होती है:
ब्याज = (मूलधन × सालाना ब्याज दर × अवधि) / 100
आप इसे ऑनलाइन कैलकुलेटर से भी आसानी से निकाल सकते हैं।
रिड्यूसिंग रेट क्या होती है?
रिड्यूसिंग रेट में हर बार जब आप EMI चुकाते हैं, तो ब्याज की गणना आपके लोन के बचे हुए हिस्से पर होती है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे आप लोन चुकाते जाते हैं, आपका मूलधन कम होता जाता है और उस पर लगने वाला ब्याज भी घटता जाता है। इसकी गणना थोड़ी जटिल होती है, क्योंकि इसमें हर EMI के बाद मूलधन कम होने के साथ ब्याज भी बदलता रहता है।
रिड्यूस्ड ब्याज = मंथली EMI × कुल अवधि (महीनों में) - मूलधन
EMI का फॉर्मूला है:
EMI = [P × I × (1+I) ^T] / [((1+I)^T) -1)]
यहां:
P = मूलधन
I = ब्याज दर / (100 × 12) (मासिक ब्याज दर)
T = वर्षों की संख्या × 12 (महीनों में कुल अवधि)
आप ऑनलाइन कैलकुलेटर का उपयोग करके भी इस पर ब्याज की गणना कर सकते हैं।
कौन सी रेट है ज्यादा फायदेमंद
फ्लैट रेट में आप पूरी अवधि के लिए पूरी मूल राशि पर ब्याज देते हैं, भले ही आपने कुछ राशि चुका दी हो। वहीं, रिड्यूसिंग रेट में आप केवल शेष मूलधन पर ही ब्याज देते हैं, जिससे समय के साथ आपकी कुल ब्याज देनदारी कम हो जाती है। इसलिए, रिड्यूसिंग रेट वाले लोन का चुनाव करना ज़्यादा फायदेमंद होता है।