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Groww ने IPO लाने के लिए SEBI के पास गुपचुप तरीके से फाइल किया DRHP, जानें ऐसा करने की वजह?

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : May 26, 2025 01:53 pm IST,  Updated : May 26, 2025 01:53 pm IST

स्टॉक ब्रोकिंग फर्म ग्रो की मूल कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स ने IPO के लिए SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) दाखिल किया है।

Groww IPO- India TV Hindi
ग्रो आईपीओ Image Source : FILE

स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी Groww अपना IPO लाएगी। कंपनी ने SEBI के पास गुपचुप तरीके से DRHP फाइल किया है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने सोमवार को बताया कि ‘स्टॉक ब्रोकिंग’ कंपनी ने गोपनीय मार्ग से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI ) के समक्ष दस्तावेज दाखिल किए। आईपीओ का अनुमानित साइज 70 करोड़ डॉलर से एक अरब डॉलर के बीच हो सकता है। यह नए निर्गम और बिक्री पेशकश (ओएफएस) का संयोजन होगा। आखिर, ग्रो ने गुपचुप तरीके से आईपीओ फाइल करने का रास्ता क्यों चुना? कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं? आइए जानते हैं। 

गुपचुप तरीके से DRHP फाइल करने का क्या मतलब है?

जब कोई कंपनी सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को पब्लिक करने की बजाय गुपचुप करती है, तो इसका मतलब है कि वह SEBI को यह दस्तावेज रिव्यू के लिए भेजती है, लेकिन इसे तुरंत सार्वजनिक नहीं करती। भारत में गोपनीय फाइलिंग की अवधारणा नवंबर 2022 में शुरू की गई थी।

आखिर, कंपनियां ऐसा क्यों करती है? आइए जानते हैं। 

  • मार्केट सेंटिमेंट भांपने का समय मिलता है: कंपनी मार्केट की स्थिति का आंकलन करना चाहती है कि IPO लाने का यह सही समय है या नहीं।
  • बिजनेस और स्ट्रैटेजी छुपी रहती है: कॉम्पिटिटर्स को कंपनी की रणनीति, विस्तार योजना या फाइनेंशियल्स तुरंत पता नहीं चलते।
  • IPO कैंसिल करने का रास्ता खुला रहता है: अगर कंपनी बाद में IPO ना लाने का फैसला करे, तो उसकी प्रतिष्ठा पर असर नहीं पड़ता क्योंकि DRHP कभी पब्लिक ही नहीं हुई।
  • संभावित इन्वेस्टर्स से निजी बातचीत संभव: कंपनी IPO से पहले कुछ बड़े इन्वेस्टर्स से निजी बातचीत कर सकती है, ताकि बेहतर एंकर बुक तैयार की जा सके।
  • रीव्यू प्रोसेस में सुधार की गुंजाइश: SEBI अगर कोई सुझाव दे या बदलाव मांगे तो कंपनी उसे पहले ही चुपचाप ठीक कर सकती है, बिना पब्लिक इमेज को नुकसान पहुंचाए।

सत्य नडेला, टाइगर कैपिटल जैसे निवेशक 

मामले से परिचित लोगों ने बताया कि कंपनी को पीक XV, टाइगर कैपिटल और माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सत्य नडेला जैसे प्रमुख निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। कंपनी आईपीओ से प्राप्त राशि का इस्तेमाल प्रौद्योगिकी विकास एवं कारोबार विस्तार में निवेश के लिए करने की योजना बना रही है। 

आईपीओ को मैनेज करेंग ये बैंकर 

इस निर्गम का प्रबंधन करने के लिए ग्रो ने जेपी मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स प्राइवेट लिमिटेड, एक्सिस कैपिटल लिमिटेड और मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज लिमिटेड को नियुक्त किया है। ग्रो की स्थापना 2016 में की गई थी। यह वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाला खुदरा ब्रोकिंग मंच बन गई, जिसके पास मार्च 2025 तक 26 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी थी। 

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