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NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ला सकता है 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ, SEBI के पास जमा किए दस्तावेज

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jun 17, 2026 11:40 pm IST,  Updated : Jun 17, 2026 11:40 pm IST

एनएसई का आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (OFS) पर आधारित होगा, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे।

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NSE IPO Image Source : ANI

NSE IPO: देश का प्रमुख शेयर बाजार एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने बुधवार को आईपीओ की मंजूरी के लिए बाजार नियामक सेबी के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल कर दिए। करीब 30,000 करोड़ रुपये के आकार वाला ये आईपीओ पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री पेशकश पर आधारित होगा। सूत्रों ने कहा कि अनलिस्टेड मार्केट में वैल्यूएशन के आधार पर इस आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। ये बहुप्रतीक्षित आईपीओ अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है।

NSE के शेयरहोल्डर बेचेंगे 14.89 करोड़ शेयर

मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (OFS) पर आधारित होगा, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। इस आईपीओ के जरिए शेयरहोल्डर सामूहिक रूप से एनएसई में अपनी करीब 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। आईपीओ के जरिए एनएसई में हिस्सेदारी बेचने वाले प्रमुख प्रोमोटरों में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शामिल है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। जबकि, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। 

एनएसई में है एसबीआई की 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी

एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी सब्सिडरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास एनएसई में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। हिस्सेदारी बेचने वाले अन्य प्रमुख प्रोमोटरों में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (1.19 करोड़ शेयर), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्राइवेट लिमिटेड (1.12 करोड़ शेयर), बैंक ऑफ बड़ौदा (1.10 करोड़ शेयर) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (1.09 करोड़ शेयर) शामिल हैं। हालांकि, एनएसई में सबसे ज्यादा 10.72 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली सरकारी इंश्योरेंस कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) इस आईपीओ में कोई शेयर नहीं बेचेगी। 

1 दशक से अटकता आ रहा है एनएसई का आईपीओ

एनएसई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 6 फरवरी को प्रस्तावित आईपीओ को मंजूरी दी थी। ये मंजूरी सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NoC) मिलने के बाद दी गई थी। एनएसई की लिस्टिंग की योजना लगभग एक दशक से अलग-अलग नियामकीय कारणों, खासकर 'को-लोकेशन' विवाद की वजह से अटकी हुई थी। जनवरी में सेबी द्वारा एनओसी दिए जाने के बाद आईपीओ प्रक्रिया को फिर से गति मिली। 

एनएसई ने आईपीओ लाने के लिए पहली बार 2016 में दाखिल किए थे दस्तावेज

आईपीओ की तैयारी के तहत एनएसई ने 20 मर्चेंट बैंकर के अलावा कानूनी सलाहकारों और अन्य मध्यस्थों की नियुक्ति की है। अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है। एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। एनएसई ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी। 

को-लोकेशन मामले में दायर किया था निपटान आवेदन

को-लोकेशन मामले में एनएसई ने जून, 2025 में सेबी के पास निपटान आवेदन दायर किया था। इस मामले में कुछ ब्रोकरों पर एक्सचेंज की ट्रेडिंग सिस्टम तक विशेष पहुंच प्राप्त करने का आरोप था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने 2025 में मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी, जिससे उसकी लिस्टिंग की राह आसान हुई। 

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