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कच्चे तेल का भाव 30 दिन में 56% उछल गया, इतने डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

 Published : Mar 23, 2026 11:00 am IST,  Updated : Mar 23, 2026 11:00 am IST

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के बढ़ते अटैक के बाद ईरान ने आक्रामक रुख अपना लिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है, जिसका असर कच्चे तेल के उत्पादन और सप्लाई दोनों पर पड़ रहा है, जिसका नतीजा है कि कीमतें लगातार बढ़ गई हैं।

मार्च की शुरुआत में भारत के क्रूड आयात में क्षेत्रीय तनावों के कारण बड़ी गिरावट आई। - India TV Hindi
मार्च की शुरुआत में भारत के क्रूड आयात में क्षेत्रीय तनावों के कारण बड़ी गिरावट आई। Image Source : FREEPIK

अमेरिका-इज़राइल और ईरान युद्ध के शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखी गई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि युद्ध से पहले यह लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था। इस उछाल ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर रुकावट की चेतावनी दी है। सिर्फ पिछले 30 दिनों में क्रूड की कीमतों में लगभग 56% की वृद्धि हुई है, जो मौजूदा आपूर्ति संकट की गंभीरता को उजागर करती है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और प्रमुख सप्लाई मार्गों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान, इस तेजी के मुख्य कारण हैं।

संकट का LNG आपूर्ति पर असर

खबर के मुताबिक, इस संकट का असर वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG आपूर्ति पर भी पड़ा है। कतर में ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ईरानी हमलों के चलते कतर की महत्वपूर्ण फैसिलिटीज प्रभावित हुई हैं, जिससे उसके LNG निर्यात क्षमता का लगभग 17% प्रभावित हुआ। यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का लगभग 47% कतार से आयात करता है।

भारत के क्रूड आयात में बड़ी गिरावट

सिस्टमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च की शुरुआत में भारत के क्रूड आयात में क्षेत्रीय तनावों के कारण बड़ी गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, “6 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का क्रूड आयात मात्र 1.9 मिलियन बैरल रहा, जबकि फरवरी 2026 में यह औसतन 25 मिलियन बैरल और मार्च 2026 में 35 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह था। रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि मध्य पूर्व से क्रूड आपूर्ति में कमी इसका मुख्य कारण है। 

सऊदी अरब का निर्यात घटा

सऊदी अरब, इराक और UAE जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के निर्यात में भी भारी गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब का निर्यात मार्च की पहली और दूसरी सप्ताह में क्रमशः 26 और 12 मिलियन बैरल रहा, जबकि फरवरी में यह औसतन 42 और 33 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह था। लगातार सप्लाई चेन में व्यवधान और ऊर्जा अवसंरचना को हुए नुकसान ने वैश्विक ऊर्जा उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है, खासकर उन देशों के लिए जो आयात पर निर्भर हैं, जैसे भारत।

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